महिलाओं के लिए कर्नाटक की बड़ी पहल, रजोनिवृत्ति पर बनाई भारत की पहली स्वास्थ्य नीति
कर्नाटक 'ऋतुतारे' नाम से अपनी नई नीति शुरू करने जा रहा है। इसे भारत की पहली महिला स्वास्थ्य नीति बताया जा रहा है, जो रजोनिवृत्ति और पेरिमेनोपॉज जैसी स्थितियों पर खास ध्यान देगी। राज्य के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री यूटी खादर ने इसकी घोषणा की है।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को मदद पहुंचाना है जो हॉट फ्लैशेस, घबराहट और जोड़ों के दर्द जैसे लक्षणों का सामना करती हैं। ये लक्षण अक्सर रजोनिवृत्ति से कई साल पहले ही दिखने लगते हैं, जो आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच होती है, लेकिन अक्सर इन पर ध्यान नहीं दिया जाता।
आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर फैलाई जाएगी जागरूकता
आने वाले 6 महीनों में, आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं से रजोनिवृत्ति के बारे में चर्चा करेंगी। वे स्वास्थ्य संबंधी जानकारी जुटाएंगी और लक्षणों की शुरुआती पहचान में मदद करेंगी, ताकि समय पर सही इलाज मिल सके।
इसके साथ ही, रजोनिवृत्ति विशेषज्ञ डॉक्टर ज्योत्सना की अध्यक्षता में बनी एक समिति भी नीति के लिए विशेषज्ञ सलाह देगी। यह समिति सुनिश्चित करेगी कि महिलाओं को मिलने वाली सहायता पूरी तरह से वैज्ञानिक तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित हो। अभिनेत्री और पूर्व सांसद राम्या को इस अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। उनका लक्ष्य है कि रजोनिवृत्ति को लेकर समाज में फैली चुप्पी को तोड़ा जाए, खासकर ग्रामीण इलाकों में, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं अपनी ज़रूरत के हिसाब से मदद हासिल कर सकें।