मां की अनदेखी पड़ी महंगी! कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेटी से वापस ली संपत्ति
कर्नाटक हाई कोर्ट ने 62 साल की जी हेमा को उनकी संपत्ति वापस दिला दी है। उनकी बेटी आर पवित्रा ने उनकी देखभाल करने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने अपनी मां को नजरअंदाज कर दिया। जी हेमा ने अपनी संपत्ति इस उम्मीद में ट्रांसफर की थी कि किराए से आने वाली कमाई से उन्हें सहारा मिलेगा। मगर ऐसा नहीं हुआ, उन्हें किराए के मकान में रहना पड़ा, वहीं उनके बच्चे उस संपत्ति का फायदा उठाते रहे। मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट के तहत आने वाले मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल ने यह गिफ्ट डीड रद्द कर दी, क्योंकि पवित्रा अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा पाईं।
न्यायमूर्ति मजिदुम ने माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारियों पर जोर दिया
यह फैसला साफ करता है कि संपत्ति ट्रांसफर करने से माता-पिता के देखभाल के अधिकार खत्म नहीं हो जाते। अगर उनकी देखभाल की जिम्मेदारी को अनदेखा किया जाता है, तो अदालतें हस्तक्षेप कर सकती हैं। न्यायमूर्ति मजिदुम ने स्पष्ट किया कि अपने माता-पिता की देखभाल न करना सिर्फ निराशा ही नहीं देता, बल्कि कानूनी और नैतिक तौर पर भी आपको भारी पड़ सकता है। यह फैसला एक अहम सबक देता है कि पारिवारिक समझौते केवल कागजी खानापूर्ति नहीं होते, बल्कि उनके साथ सच्ची जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं।