कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय तीर्थयात्री नेपाल की बाढ़ में कैसे फंस गए?
क्या है खबर?
बीते दिन नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ में 270 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और करीब 1,600 लापता हैं। हताहत लोगों में वे तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए गए थे। ये लोग रसुवागढ़ी सीमा चौकी के पास से या तो तिब्बत जा रहे थे या वापस आ रहे थे। आइए जानते हैं तीर्थयात्री कैसे बाढ़ की चपेट में आ गए।
कैलाश यात्रा
सबसे पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा के बारे में जानिए
कैलाश मानसरोवर यात्रा तिब्बत में कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की तीर्थयात्रा है। यहां हिंदू, जैन, बौद्ध और बोन धर्म के अनुयायी जाते हैं। इस दौरान तीर्थयात्री तिब्बत, चीन में स्थिति कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक जाते हैं।
लगभग 6,638 मीटर ऊंचा कैलाश पर्वत कई धर्मों में पवित्र माना जाता है। हिंदुओं के लिए यह परंपरागत रूप से भगवान शिव और देवी पार्वती का निवास स्थान है।
बौद्ध, जैन और बोन परंपराओं में भी इसका गहरा महत्व है।
रास्ते
भारत सरकार 2 रास्तों से करवाती है कैलाश मानसरोवर यात्रा
भारत से कैलाश मानसरोवर जाने के लिए 3 रास्ते हैं। एक रास्ता उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में लिपुलेख दर्रे से होकर जाता है, तो दूसरा रास्ता सिक्किम के नाथु ला दर्रे से है। इन दोनों रास्तों के जरिए भारत सरकार यात्रा करवाती है।
हर साल लगभग 1,000 लोगों का चयन लॉटरी के जरिए किया जाता है। इस यात्रा पर हर व्यक्ति करीब 2 लाख रुपये तक खर्च आता है।
नेपाल
तो फिर नेपाल में क्या कर रहे थे तीर्थयात्री?
हालांकि, भारत से कोटा सीमित होने के कारण, कई तीर्थयात्री नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों के जरिए यात्रा करते हैं। यहां के 2 सबसे लोकप्रिय मार्ग हैं, एक रसुवा से होकर गुजरता है और दूसरा हिल्सा से।
पहले मार्ग में काठमांडू-स्याफ्रुबेसी-टिमुरे-रसुवागढ़ी-केरुंग/ग्यिरोंग-सागा-मानसरोवर-दारचेन-कैलाश शामिल है। इसमें नेपाल की तरफ रसुवा और चीन की तरफ केरुंग/ग्यिरोंग पड़ता है।
दूसरा रास्ते में हेलीकॉप्टर के जरिए जाया जाता है, जिसमें काठमांडू से नेपालगंज फिर सिमिकोट होते हुए हिल्सा तक जाया जाता है।
वजह
नेपाल का रास्ता क्यों चुनते हैं तीर्थयात्री?
इसकी कई वजहें हैं। पहली ये कि भारत सरकार करीब 1,000 लोगों को ही यात्रा के लिए चुनती है। ऐसे में बचे हुए यात्री नेपाल के जरिए जाते हैं।
दूसरी नेपाल की ओर से यात्रा आसान भी पड़ती है। यहां से यात्री सड़क यात्रा, ट्रेकिंग और हेलीकॉप्टर परिवहन के जरिए अलग-अलग तरीकों से सफर कर सकते हैं। कुछ तीर्थयात्रियों के लिए काठमांडू से यात्री शुरू करना लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से भी सुविधाजनक होता है।
यात्री
कैसे फंस गए यात्री?
बीते दिन जो बाढ़ आई, उसने ल्हेंदे और भोटे कोशी नदी को सबसे ज्यादा प्रभावित किया। इससे रसुवा और रसुवागढ़ी क्षेत्र के आसपास सैलाब आया।
रसुवा और रसुवागढ़ी स्थित सीमा चौकी कैलाश पर्वत की ओर जाने वाले मार्ग से नेपाल से तिब्बत में प्रवेश करने का मुख्य रास्ता है। यही वजह है कि बाढ़ की चपेट में कई तीर्थयात्री भी आ गए।
रास्ते में आने वाला अहम पड़ाव ग्यिरोंग बंदरगाह भी बाढ़ से भीषण तरीके से प्रभावित हुआ है।
संख्या
बाढ़ के वक्त इलाके में कितने तीर्थयात्री मौजूद थे?
बुधवार को 390 तीर्थयात्रियों के सीमा पार करने का कार्यक्रम था, जिसमें 93 नेपाली और बाकी अलग-अलग देशों के लोग शामिल थे।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बुधवार को 10 ट्रेवल एजेंसियों के कुल 384 यात्री मानसरोवर यात्रा पर थे।
विदेशी नागरिकों में कम से कम 105 भारत, 12 ब्रिटेन, 4 दक्षिण अफ्रीका, 17 मलेशिया, 3 अमेरिका और एक-एक ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक थे। कई यात्रियों की नागरिकता अभी पता नहीं है।