RSS से जुड़ाव के आरोपों पर क्या CBI आबकारी नीति केस से हटेंगी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा?
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा जल्द ही उस मामले पर फैसला सुनाने वाली हैं, जिसमें यह तय होना है कि उन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के आबकारी नीति से जुड़े केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए या नहीं। दरअसल, अरविंद केजरीवाल और कुछ अन्य लोगों ने उनके कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े एक संगठन से संबंध होने पर चिंता जताई थी। इसके बाद ही यह अर्जी दायर की गई थी। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि इस तरह का अनुरोध उनके सामने पहली बार आया है। हालांकि, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे इस मामले में पूरी तरह निष्पक्ष होकर अपना फैसला देंगी।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा का कानूनी सफर
न्यायमूर्ति शर्मा ने अपनी पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से पूरी की। उन्होंने पहले अंग्रेज़ी साहित्य पढ़ा और फिर कानून की डिग्री हासिल की। महज 24 साल की उम्र में ही वे मजिस्ट्रेट बन गईं। इसके बाद उन्होंने मुख्य जिला और सत्र न्यायाधीश के तौर पर भी काम किया। साल 2022 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट में जज नियुक्त किया गया। अदालती कामकाज के अलावा भी उन्होंने कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके पास न्यायिक शिक्षा में पीएचडी की डिग्री है और उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के साथ-साथ कानूनी शिक्षा पर भी कई किताबें लिखी हैं।