मुख्यमंत्री मान के दफ्तर पर CBI छापे का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जस्टिस नागू ने सुनवाई से खुद को हटाया
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस शील नागू ने पंजाब की उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है, जिसमें हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में मुख्यमंत्री भगवंत मान के दफ्तर में कथित भ्रष्टाचार को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने को कहा गया था।
उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि पहले वह कुछ याचिकाकर्ताओं के साथ जुड़े मामलों को देख चुके थे। इस पर जस्टिस दीपांकर दत्ता ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट में 17 और बेंच हैं, यह मामला किसी भी दूसरी बेंच के पास जा सकता है।" अब कोई दूसरी बेंच इस मामले की सुनवाई कर सकती है।
जांच में राजबीर सिंह घुमन निशाने पर
यह पूरा मामला 5 अक्टूबर को तब शुरू हुआ, जब हाईकोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया था। इस जांच का निशाना मान के दफ्तर के कई बड़े अधिकारी हैं, खासकर उनके ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन।
उन पर आरोप हैं कि उन्होंने सरकारी प्रक्रियाओं में हेरफेर करने के लिए रिश्वत ली थी। राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण इस मामले पर सबकी खास नजर है।
उधर, पंजाब सरकार का कहना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार विपक्षी दलों के खिलाफ राजनीतिक हमले करने के लिए CBI जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।