जस्टिस नागरत्ना ने संभाला सबरीमाला फैसले का मसौदा, क्या मंदिर में बदलेगी परंपरा?
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले पर एक अहम फैसला आने वाला है। इस फैसले का मसौदा जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बनाना शुरू कर दिया है। यह मामला इस बात से जुड़ा है कि केरलम के मशहूर सबरीमाला मंदिर में क्या सभी उम्र की महिलाएं जा सकती हैं या नहीं।
मई 2026 में जब सुनवाई पूरी हो गई, तो नौ जजों में से वह पहली हैं जिन्होंने इस मसौदे पर काम शुरू किया है।
यह मामला सबरीमाला में लैंगिक प्रतिबंधों पर सवाल उठाता है
यह मामला बहुत अहम है क्योंकि यह सबरीमाला मंदिर में पुरानी लैंगिक पाबंदियों पर सवाल उठाता है। इस फैसले से तय हो सकता है कि भारत धार्मिक आजादी और समानता के बीच कैसा संतुलन बिठाता है।
जस्टिस नागरत्ना को उनके बेबाक और स्वतंत्र विचारों के लिए जाना जाता है। 2023 के नोटबंदी मामले में भी उन्होंने अलग राय रखी थी। इसी वजह से हर कोई बेसब्री से देख रहा है कि वह राज्य सरकार के कदमों और धार्मिक अधिकारों को लेकर क्या रुख अपनाती हैं।
इस अंतिम फैसले का पूरे देश में आस्था, लिंग और कानून से जुड़ी भविष्य की बहसों पर काफी गहरा असर पड़ सकता है।