झारखंड सरकार और छात्रों के बीच दूसरी बातचीत भी बेनतीजा, सुझाव के लिए ई-मेल जारी
क्या है खबर?
झारखंड PSC और SSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहे छात्र प्रदर्शन का आज 15वां दिन है। आज छात्रों और सरकार के बीच दूसरी बार बातचीत हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, छात्रों ने कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को सुन लिया है और वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ चर्चा होने का इंतजार करेंगे और उसके बाद ही वे भूख हड़ताल वापस लेने का फैसला करेंगे।
बातचीत
करीब एक घंटे चली बैठक
JPSC-JSSC अभ्यार्थी न्याय मंच का 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज सुबह करीब 10:30 बजे वार्ता के लिए मोराबादी स्थित गेस्ट हाउस पहुंचा था। करीब 11:30 बजे उनकी सरकार से बातचीत शुरू हुई।
सरकार की ओर से सुदिव्या कुमार सोनू, चामरा लिंडा, दीपिका सिंह पांडे और संजय यादव उपस्थित थे।
छात्र प्रतिनिधि चंदन राजक ने कहा कि बैठक में छात्रों की मांगें सुनी गईं और अब इन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।
बयान
छात्र बोले- सरकार ने मांगों को सुना
राजक ने कहा, "हमने अपनी मांगें रख दी हैं। सरकार ने उन्हें सुन लिया है और हमें आश्वासन दिया है कि इन मुद्दों को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा। कोई भी निर्णय होने के बाद ही हम भूख हड़ताल और आंदोलन समाप्त करेंगे।
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार थे।
ईमेल
सरकार ने फीडबैक के लिए ईमेल जारी किया
झारखंड सरकार ने छात्रों से सुझाव और प्रतिक्रिया लेने के लिए एक ईमेल आईडी (JPSSC.feedback@gmail.com) शुरू की है।
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा, "हम छात्र समूहों और हितधारकों के साथ बैठकें करते रहेंगे। हम एक ईमेल आईडी जारी कर रहे हैं। कोई भी छात्र, व्यक्ति या हितधारक इस पर सुझाव भेज सकता है। हम सुझावों के आधार पर एक नीति और सामूहिक निर्णय पर पहुंचने का इरादा रखते हैं। सरकार ईमेल के आधार पर उनकी चिंताओं पर ध्यान देगी।"
ABVP
ABVP का मुख्यमंत्री आवास घेराव, पुलिस ने रोका
आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोका तो हंगामे की स्थिति बन गई। कुछ कार्यकर्ता सड़क पर ही लेट गए तो कुछ पुलिस वाहनों पर चढ़ गए।
एक ABVP कार्यकर्ता ने कहा, "झारखंड सरकार छात्रों के आंदोलन को दबाना चाहती है। हमारे साथियों को गिरफ्तार किया गया है। हेमंत सोरेन ने झारखंड को बदनाम और बर्बाद करने के साथ साथ युवाओं का भविष्य नष्ट करने में भूमिका निभाई है।"
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा मामला
JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में 19 अप्रैल को हुई प्रारंभिक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई है। साथ ही प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, OMR शीट की अभिरक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की गई है।
मांगें
क्या हैं छात्रों की मांगें?
छात्र JPSC, JSSC-CGL समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की CBI जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करना, JPSC और JSSC दोनों में संरचनात्मक सुधार करना, भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच या तो CBI या झारखंड के बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के जजों के एक स्वतंत्र पैनल द्वारा करवाना शामिल है।