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झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में एक हाथी ने कैसे मचाया आतंक? अब तक 22 की मौत
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक नर हाथी ने आतंक मचाया (प्रतीकात्मक तस्वीर)

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम में एक हाथी ने कैसे मचाया आतंक? अब तक 22 की मौत

लेखन गजेंद्र
Jan 21, 2026
03:43 pm

क्या है खबर?

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में इस समय एक नर हाथी की काफी चर्चा है। उसने पिछले 20 दिनों से चाईबासा और कोलहान वन प्रभाग क्षेत्र में आतंक मचा रखा है। हाथी पूरी तरह काबू से बाहर है, जिसके कारण अब तक उसने 22 लोगों की जान ले ली है। मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। वन विभाग हाथी को पकड़ने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। पूरी मामला क्या है? आइए, जानते हैं।

आतंक

1 जनवरी से जारी है हाथी का आतंक

जिले में आतंक मचाने वाला हाथी 1 जनवरी से लोगों को मार रहा है। वह अपने झुंड से अलग हो गया है और प्रतिदिन 30 किलोमीटर चल रहा है। उसने सबसे पहले 1 जनवरी को 34 साल के मंगल सिंह हेम्ब्रम को कुचलकर मारा था, जिसके बाद से लगातार लोगों पर हमले जारी है। राज्य में पहली बार एक नर हाथी के कारण ऐसे हालात बने हैं। वन विभाग की प्राथमिकता हाथी को सुरक्षित जंगल पहुंचाने की है।

मौत

जंगल से लेकर घर तक मौत का तांडव, 6 जनवरी को 6 को मारा

मंगल की मौत के बाद 1 जनवरी की रात बिरसिंह हातु में हाथी ने 62 साल के उरदुब बहॉदा को मार दिया। वे घटना के समय खेत में धान की रखवाली कर रहे थे। उसी रात ग्राम रोड़ो में 42 साल के विष्णु सुंडी को भी घर के बरामदे में सोते समय हाथी ने कुचल दिया। 6 जनवरी की रात नोवामुंडी प्रखंड स्थित बाबाड़िया गांव में झोपड़ी के नीचे सो रहे परिवार के 6 लोगों को हाथी ने मार दिया।

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कारण

हाथी क्यों हुआ काबू से बाहर?

एक नर हाथी के इस तरह बेकाबू होने को लेकर लोगों में सवाल है। कोल्हान के जिला वन अधिकारी कुलदीप मीणा कहते हैं कि पहला करण हाथी के झुंड से भटकना है और दूसरा कारण उसकी मेटिंग स्टेज को लेकर है। ऐसे समय नर हाथी में प्रजनन हार्मोन टेस्टोस्टेरोन में भारी बढ़ोतरी होती है, जिससे एकल नर हाथी बहुत आक्रामक हो जाता है। हालांकि, 15-20 दिन में हाथी ठीक हो जाता है, लेकिन ऐसी कोई संभावना दिखी नहीं है।

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मदद

सरकार क्या कर रही है?

झारखंड सरकार ने हाथी के आतंक को देखते हुए पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और मृतकों को तत्काल आर्थिक सहायता दी है। पश्चिम बंगाल और ओडिशा की मदद से बड़ा अभियान शुरू किया है। वन विभाग ने उसे ट्रैक करने और पकड़ने के लिए 100 लोगों की 10 विशेष टीम बनाई गई है। हाथी को 3 बार बेहोश किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ। लोगों को आगाह किया जा रहा है।

संघर्ष

झारखंड में हाथियों और मानव का संघर्ष पुराना

झारखंड में करीब 550 से 600 हाथी मिलते हैं, जिनमें पलामू और दक्षिणी छोटानागपुर में 2 मुख्य समूह सक्रिय हैं। कोलहान व चाईबासा में 53 हाथी के अलग-अलग झुंड हैं। हाथी शांत जानवर माना जाता है, लेकिन अक्सर वे जंगल के समीप बनी बस्तियों में भोजन और पानी की तलाश में पहुंचते हैं, जहां उनका मानव से सामना होता है। वर्ष 2000 से 2025 के बीच हाथियों के हमलों में 1,400 लोगों की मौत हुई, जो आगे बढ़ सकती है।

ट्विटर पोस्ट

झारखंड में हाथी का आतंक

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