झारखंड हाई कोर्ट का कड़ा संदेश, कहा- दहेज उत्पीड़न से तंग पत्नी का जाना त्याग नहीं
झारखंड हाई कोर्ट ने एक पति की तलाक की अर्जी को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। कोर्ट का कहना है कि पत्नी ने उसका त्याग नहीं किया है, बल्कि दहेज उत्पीड़न की वजह से घर छोड़ दिया था। जजों ने यह साफ किया कि क्रूरता की वजह से घर छोड़ना और बिना किसी वजह के छोड़ देना, दो अलग बातें हैं, इसलिए यहां त्याग का आम नियम लागू नहीं होता।
दहेज के लिए पति और रिश्तेदारों को सजा
साल 2001 में दोनों की शादी हुई थी और 2005 में वे अलग हो गए। बताया जा रहा है कि पति ने पत्नी के परिवार से 3 लाख रुपये, एक बिस्तर और जमीन की मांग की थी। जब परिवार पैसे नहीं दे पाया, तो पत्नी ने पति पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का इलजाम लगा दिया। इस शिकायत के बाद कोर्ट ने पति और उसके रिश्तेदारों को दहेज से जुड़े जुर्म में दोषी ठहराया। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि अगर उसे सुरक्षित महसूस होता, तो वह वापस आने के लिए तैयार थी, लेकिन पति के क्रूरता और त्याग के दावों के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं मिला।