क्या ISRO का होगा निजीकरण? चेयरमैन ने दिया दो टूक जवाब
भारतीय अंतरिक्ष शोध संस्थान (ISRO) के अध्यक्ष वी नारायणन ने साफ कर दिया है कि ISRO का निजीकरण नहीं हुआ है और यह अब भी पूरी तरह एक सरकारी संगठन है। कर्मचारियों ने आशंका जताई थी कि कहीं काम निजी कंपनियों को न सौंप दिया जाए या इसरो का निजीकरण न हो जाए। इन्हीं चिंताओं को दूर करने के लिए नारायणन ने यह बात साफ की है। बेंगलुरु स्पेस एक्सपो में उन्होंने साफ-साफ कहा कि ISRO का न तो निजीकरण हुआ है और न ही यह कोई निजी संस्था है। यह एक सरकारी संस्था ही बनी रहेगी।
ISRO 450 उद्योगों के साथ मिलकर काम कर रहा
नारायणन ने यह भी बताया कि ISRO अपने मिशनों को सफल बनाने के लिए 450 उद्योगों के साथ मिलकर काम करता है। ISRO के रॉकेट बजट का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सीधे भारतीय उद्योगों को ही फायदा पहुंचाता है। फिलहाल इसरो की 56 अंतरिक्ष संपत्तियां काम कर रही हैं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए उन्हें अब और ज्यादा लॉन्च करने होंगे। नारायणन ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब अंतरिक्ष में लॉन्च बहुत कम होते थे, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।