सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जबरन खत्म करवा सकती है सरकार, क्या कहता है कानून?
क्या है खबर?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को बीते दिन पुलिस ने अस्पताल शिफ्ट कर दिया था। पुलिस ने कहा कि वांगचुक के स्वास्थ्य को देखते हुए हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए ऐसा किया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने के बाद भी वांगचुक का अनशन जारी है। उन्होंने दवा लेने से इनकार कर दिया है। आइए जानते हैं क्या सरकार जबरन उनका अनशन तुड़वा सकती है।
अधिकार
क्या भूख हड़ताल नागरिकों का मौलिक अधिकार है?
लाइव लॉ के मुताबिक, 2018 मेंएक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(अ) और (ब) के तहत लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और किसी सरकारी काम या फैसले का विरोध करने का अधिकार है।
1972 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार सड़कों पर होने वाले विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह सभी सड़कों या सार्वजनिक जगहों को बंद कर दे।
सुप्रीम कोर्ट
ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहा है?
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों और आदेशों में कह चुका है कि भूख हड़ताल पर बैठे शख्स के जीवन की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन ये भी सुनिश्चित करना होगा कि इससे उसका असहमति जताने का अधिकार बाधित न हो।
द हिंदू के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में साफ किया है कि सरकार को अपनी बात रखने के लिए अनशन का सहारा लेने वाले लोगों के प्रति टकराव का रवैया नहीं अपनाना चाहिए।
बड़े मामले
पहले कब-कब सामने आए हैं ऐसे मामले?
2024 में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वे डल्लेवाल को पर्याप्त चिकित्सकीय मदद उपलब्ध कराएं और हड़ताल जारी रखने के उनके फैसले का सम्मान करें।
2011 में अन्ना आंदोलन के समय हुए प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था।
इलाज
क्या कानून अपराध है भूख हड़ताल?
क्या किसी मांग को लेकर भूख हड़ताल करना और इलाज न लेना अपराध माना जाएगा?
BBC के मुताबिक, फरवरी 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने इस सवाल का जवाब न में दिया था।
तब जस्टिस एन आनंद वेंकटेश ने कहा था, "भूख हड़ताल IPC की धारा 309 के तहत अपराध नहीं बनता। रिकॉर्ड पर उपलब्ध सभी तथ्यों को ज्यों का त्यों स्वीकार भी कर लिया जाए, तब भी धारा 309 के तहत कोई अपराध सिद्ध नहीं होता।"
खाना
क्या भूख हड़ताल में जबरदस्ती खिलाया जा सकता है?
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के माल्टा घोषणापत्र के अनुसार, भूख हड़ताल करने वाले व्यक्ति को जबरदस्ती ऐसा इलाज नहीं दिया जाना चाहिए, जिसे लेने से उनसे मना किया हो। ऐसे मामलों में कोर्ट का भी यही रुख रहा है।
हालांकि, ये अलग-अलग मामलों पर निर्भर करता है। इरोम शर्मिला के मामले में जबरदस्ती खाना खिलाने पर कोर्ट ने दखल नहीं दिया।
वहीं, डल्लेवाल के मामले में कोर्ट ने स्वास्थ्य को देखते हुए केवल अस्पताल ले जाने का आदेश दिया था।