ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों में उड़ान बाधित, जानिए कितना पड़ रहा असर
क्या है खबर?
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान अपने पड़ोस के खाड़ी देशों में मिसाइल-ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे हवाई सेवाएं बुरी तरह बाधित हुई हैं। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में 27,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और काफी अधिक यात्री प्रभावित हुए हैं। खाड़ी क्षेत्रों के बड़े हवाई अड्डों पर भी स्थिति प्रतिकूल है। युद्ध का हवाई क्षेत्र पर कितना व्यापक असर पड़ा है? आइए, जानते हैं।
हवाई यात्रा
दुबई में हर साल 9.2 करोड़ यात्रियों का आवागमन
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दुनिया का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, जो प्रतिवर्ष लगभग 9.2 करोड़ यात्रियों को संभालता है। यहां 24 घंटे में लगभग हर 72 सेकंड में एक उड़ान का प्रस्थान या आगमन होता है। यह हवाई अड्डा पहली बार 28 फरवरी को ठप हुआ था। इसके बाद दोहा और अबू धाबी सहित खाड़ी के प्रमुख विमानन केंद्रों को भी बंद किया गया। पिछले 3 दिन में 10 लाख से अधिक यात्री हवाई अड्डों पर फंसे थे।
आवागम
यूरोप को दक्षिण एशिया से जोड़ने वाला गलियारा
खाड़ी देशों के सिर्फ हवाई अड्डे ही नहीं बल्कि इराक और ईरान के ऊपर का हवाई क्षेत्र भी यूरोप को दक्षिण और दक्षिणपूर्व एशिया से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण गलियारा है। इस मार्ग के केंद्र में 3 प्रमुख खाड़ी हवाई अड्डे पड़ते हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 90,000 यात्रियों का आवागमन है। तनाव के बाद हवा में मौजूद 145 विमानों को बीच रास्ते में ही वापस लौटना पड़ा, जिससे ईरान के ऊपर का आसमान देखते ही देखते खाली हो गया।
असर
हवाई माल ढुलाई पर भी असर
सिर्फ आवागमन ही नहीं बल्कि खाड़ी देशों में हवाई मार्ग बाधित होने से हवाई माल ढुलाई में भी व्यवधान आया है। प्रमुख हवाई क्षेत्र के बंद होने से जल्दी पहुंचाने वाले सामान जैसे- एक्सपायरी डेट वाले टीके, तत्काल उत्पादन के लिए सेमीकंडक्टर और सीमित शेल्फ लाइफ वाले ताजे फल-सब्जियों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। वैकल्पिक मार्गों से उड़ान के समय में 90 मिनट तक बढ़ोतरी और परिचालन खर्च में लगभग 5.53 लाख रुपये प्रतिघंटे की वृद्धि होती है।
असर
भारत की विमानन सेवा पर कितना असर?
मीडिया रिपोर्ट्स में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के हवाले से बताया गया कि 28 फरवरी से अब तक खाड़ी देशों में भारतीय एयरलाइंस की 2,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। विदेशी एयरलाइंस की उड़ानें भी प्रभावित हुई हैं। सिर्फ 8 मार्च को अकेले ही 279 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुईं हैं। सबसे ज्यादा असर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े हवाई अड्डों पर दिख रहा है। कुछ हवाई मार्गों के खुलने पर विमानों का आवागमन जारी है।