ईरानी मंत्री अब्बास अराघची भारत के फैसले से नाराज, बोले- चाबहार बंदरगाह की फंडिंग रोकना निराशाजनक
क्या है खबर?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस साल भारत के केंद्रीय बजट में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई बजट आवंटित न करने को निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए फंडिंग न मिलने नई दिल्ली और तेहरान दोनों के लिए ठीक नहीं है। अराघची ने चाबहार बंदरगाह को एक स्वर्ण प्रवेश द्वार बताते हुए कहा कि यह परियोजना मध्य एशिया और यूरोप से भारत की कनेक्टिविटी को बदल सकता था।
बयान
मोदी ने एक बार कहा था...
इंडिया टुडे के साथ विशेष साक्षात्कार में अराघची ने संयुक्त रूप से विकसित परियोजना के बजट में कटौती के सवाल पर कहा, "मुझे लगता है कि यह ईरान-भारत दोनों के लिए निराशाजनक है। जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था, चाबहार एक स्वर्ण द्वार है जो हिंद महासागर क्षेत्र को मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप से जोड़ता है। यह एक अत्यंत रणनीतिक बंदरगाह है। मुझे उम्मीद है कि एक दिन हम बंदरगाह का पूर्ण विकास देख सकेंगे।"
मौत
खामेनेई की मौत से कुछ नहीं बिगड़ेगा- अराघची
अराघची ने अमेरिकी मीडिया में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की हत्या की योजना से जुड़ी खबरों को लेकर कहा कि हमारी व्यवस्था किसी खास पर निर्भर नहीं है। अराघची ने कहा कि ईरान की व्यवस्था लोगों के समर्थन से जुड़ी है, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं। उन्होंने खामेनेई के पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अल खुमैनी का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी मौत के 24 घंटे के अंदर ईरान ने दूसरा सर्वोच्च नेता चुन लिया था।
बंदरगाह
भारत ने इस बार नहीं किया कोई बजट आवंटन
भारत ने चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए 2024-25 में 400 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। इसके बाद 2025-26 में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिसे बाद में संशोधित अनुमानों में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में चाबहार बंदरगाह परियोजना में आवंटन को शून्य कर दिया गया है। यह तब है, जब भारत ने 2024 में चाबहार में शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।