भारत में बिजली संकट? फरवरी-मार्च में कोयले की भारी किल्लत का खतरा
मनीकंट्रोल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक काफी कम हो गया है और आशंका है कि फरवरी या मार्च तक उन्हें कोयले की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है।
11 अक्टूबर तक के आंकड़ों पर गौर करें तो, कोयले का कुल भंडार महज 18.25 मिलियन मीट्रिक टन ही था, जबकि इसकी जरूरत 57.23 मिलियन मीट्रिक टन है। इसका मतलब है कि प्लांटों को अगले 3 महीनों में कम से कम 31.75 मिलियन मीट्रिक टन अतिरिक्त कोयले की जरूरत है, जो लगभग 2,80,000 मीट्रिक टन हर दिन होता है, ताकि वे इस कमी को पूरा कर सकें।
भारत में बढ़ती मांग, आपूर्ति अब भी कम
एक तरफ बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ रखरखाव के टाले गए कामों ने स्थिति को और भी पेचीदा बना दिया है। खास तौर पर इसलिए क्योंकि एल नीनो के असर से अगले साल की शुरुआत में बिजली की खपत और ज्यादा बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, अक्टूबर में कोयले की आपूर्ति में थोड़ा सुधार तो देखने को मिला है, लेकिन यह अभी भी पर्याप्त नहीं है। कोयला मंत्रालय ने बताया है कि भंडार में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। उनके आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 10 अक्टूबर के बीच बिजली क्षेत्र को हर दिन औसतन 2.49 मिलियन मीट्रिक टन कोयला मिला, जो सितंबर के 2.21 मिलियन मीट्रिक टन के औसत से अधिक है।