पसंदीदा ब्रांडों के '100 प्रतिशत' दावे की खुली पोल, FSSAI ने ठोका जुर्माना
भारत के उपभोक्ता और खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण उन ब्रांडों पर नकेल कस रहे हैं जो अपने खाद्य उत्पादों के लेबल पर "100 प्रतिशत" लिख देते हैं, जबकि यह पूरी सच्चाई नहीं होती।
जून 2026 में, मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशियलिटीज पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। कंपनी अपनी ब्रेड को "100 प्रतिशत होल व्हीट" बताकर बेच रही थी, जबकि उसमें सिर्फ 87 प्रतिशत साबुत गेहूं का आटा था। इसका मकसद यही है कि कंपनियां ऐसे दावे न करें जिनसे ग्राहक भ्रमित हों और उन्हें यह समझने में मुश्किल हो कि वे असल में क्या खरीद रहे हैं।
FSSAI की चेतावनी, स्टोरिया पर जुर्माना
स्टोरिया फूड्स पर भी जुर्माना लगाया गया। कंपनी अपने पेय को "100 प्रतिशत टेंडर कोकोनट वॉटर" बताकर प्रचार कर रही थी, जबकि उसमें रीकॉन्स्टीट्यूटेड कॉन्संट्रेट (पानी मिलाकर तैयार किया गया गाढ़ा अर्क) का इस्तेमाल किया गया था। मैक्विटीज बिस्कुट को भी इसी तरह के दावे के लिए सवाल उठाया गया था। कंपनी अपनी पैकेजिंग पर "होलव्हीट" लिखती है, जबकि बिस्कुट में साबुत गेहूं की मात्रा सिर्फ 19.5 प्रतिशत होती है। पिछले साल से FSSAI ने सभी ब्रांडों को ऐसे बढ़ा-चढ़ाकर किए गए "100 प्रतिशत" के दावों को बंद करने को कहा है, खासकर तब जब वे कॉन्संट्रेट का इस्तेमाल कर रहे हों। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि ग्राहकों को पता चल सके कि उनके खाने में असल में क्या है।