सिलीगुड़ी कॉरिडोर: 35 किलोमीटर भूमिगत सुरंग से भारत की 'गर्दन' होगी अभेद्य
हाल ही में भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित सैन्य ठिकानों का दौरा किया। यह कॉरिडोर भारत की मुख्य भूमि को उसके पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला इकलौता रास्ता है। इसकी चौड़ाई 20 किलोमीटर से भी कम है, इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसका सुरक्षित होना बेहद अहम है।
उपायों में 35 किलोमीटर लंबी भूमिगत रेलवे लाइन शामिल
इसकी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए, 35 किलोमीटर लंबी एक भूमिगत रेलवे लाइन बनाने की योजना बनाई गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भी जरूरी सामान की आपूर्ति बिना रुकावट के बनी रहे। पश्चिम बंगाल सरकार ने भी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) को 7 हाईवे के हिस्से सौंपे हैं।
इसके अलावा, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को 120 एकड़ से ज्यादा जमीन मुहैया कराई गई है। इसका मकसद इलाके की बेहतर निगरानी करना और सैनिकों की आवाजाही को सुचारु रखना है। पास ही बगदोगरा एयरपोर्ट और हसीमारा एयर फोर्स स्टेशन भी मौजूद हैं, जहां राफेल जेट्स तैनात हैं। जनरल सेठ ने सुरक्षा के इन उपायों के साथ, इस संवेदनशील इलाके को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार सतर्क रहने और नए-नए तरीके अपनाने पर जोर दिया।