माइनस तापमान से रण की तपती रेत तक, भारतीय सेना ने योग से गढ़ा नया इतिहास
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21 जून को भारतीय सेना ने सियाचिन ग्लेशियर और कच्छ के रण जैसी दुर्गम जगहों पर योग का आयोजन किया। इससे पता चलता है कि योग शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए कितना जरूरी है, खासकर मुश्किल हालात में। ये आयोजन दिखाते हैं कि सेना अपने अनुशासन और जवानों की सेहत को कितना महत्व देती है।
उपेन्द्र द्विवेदी, राजनाथ सिंह ने योग को बढ़ावा दिया
सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने असम में एक सत्र में हिस्सा लिया और सबको याद दिलाया कि 'योग' शब्द का असली मतलब 'मिलना' या 'जुड़ना' है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिलांग में इस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने लोगों को बेहतर सेहत के लिए योग को अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। ये कार्यक्रम दिखाते हैं कि योग उन जवानों के लिए कितना सहायक है जो चुनौतीपूर्ण और कठिन माहौल में देश की सेवा करते हैं।