सरकार ने बनाई 19,000 करोड़ रुपये के स्वदेशी ड्रोन्स खरीदने की योजना
भारत इस साल अपने ही देश की कंपनियों से 2 अरब डॉलर (लगभग 19,115 करोड़ रोड़ रुपये) से ज्यादा के ड्रोन्स खरीदने की तैयारी में है। यह कदम 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव के बाद उठाया गया है, जब आधुनिक युद्ध में ड्रोन्स का महत्व साफ हो गया। ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट स्मित शाह ने बताया कि एक तेज प्रक्रिया के जरिए इन सामरिक ड्रोन्स को अगले 18 से 24 महीनों में सेना को सौंप दिया जाएगा।
600 से ज्यादा भारतीय ड्रोन कंपनियां कर रही काम
आजकल भारत में 600 से ज्यादा ड्रोन कंपनियां काम कर रही हैं। इनमें अडानी ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों से लेकर आइडियाफोर्ज जैसे नए स्टार्टअप्स तक सभी शामिल हैं। देश का ध्यान अब निगरानी से लेकर सटीक हमलों तक की क्षमताओं पर केंद्रित है। रक्षा मंत्रालय स्थानीय स्तर पर इनके निर्माण पर जोर दे रहा है और स्टार्टअप्स को भी अवसर दे रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे सेना के साथ-साथ भारत के टेक्नोलॉजी क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।