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मोदी-ट्रंप की प्रेस वार्ता में 'कोई सवाल नहीं' चाहता था भारत, अमेरिकी राजदूत का खुलासा
सर्जियो गोर ने दावा किया कि भारत मोदी-ट्रंप की प्रेस वार्ता में कोई सवाल नहीं चाहता था

मोदी-ट्रंप की प्रेस वार्ता में 'कोई सवाल नहीं' चाहता था भारत, अमेरिकी राजदूत का खुलासा

लेखन आबिद खान
Aug 24, 2026
10:08 am

क्या है खबर?

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने फ्रांस में G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस वार्ता को लेकर नया खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया कि भारत ने अमेरिका से अनुरोध किया था कि इस दौरान मीडियाकर्मियों को प्रश्न पूछने की अनुमति न दी जाए। गोर ने कहा कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी अधिकारियों को बताया था कि नेता मीडिया को संबोधित कर सकते हैं, लेकिन सवाल-जवाब नहीं होना चाहिए।

टिप्पणी

गोर बोले- भारत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करने की मांग की थी

गोर ने कहा, "हम पर्दे के पीछे थे। वहां सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप और मैं था। उन्होंने मुझसे पूछा, भारतीय किन मुद्दों को उठाने वाले हैं? हमने कुछ मुद्दों पर बात की। फिर उन्होंने पूछा कि क्या उनकी कोई मांग है? भारतीय विदेश मंत्रालय की एक मांग थी। उन्होंने हमसे कहा था कि मीडिया को अंदर आने देते हैं, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करते। मैंने राष्ट्रपति को ये बात बताई। उन्होंने कहा ठीक है कोई समस्या नहीं।"

अनुरोध

गोर ने कहा- ट्रंप भूल गए भारत का अनुरोध

गोर ने आगे कहा, "बैठक शुरू हुई, मीडिया अंदर आया। वहां करीब 50 कैमरे होंगे। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी आसपास बैठे थे। दोनों ने कुछ मिनट तक बात की। जैसे ही वे अपनी बात पूरी करते हैं, राष्ट्रपति सबसे पहले कैमरे की ओर देखते हैं और कहते हैं, 'कोई सवाल?' और इसके बाद सब कुछ खुल गया। इसके बाद 45 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई और सब कुछ चर्चा के लिए खुला था।"

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चर्चा

दोनों नेताओं में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

17 जून को प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की प्रेस वार्ता से कुछ दिन पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना ने एक जहाज पर हमला किया था, जिसमें 3 भारतीय मारे गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने ये मुद्दा ट्रंप के समक्ष उठाया था।

दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी चर्चा की थी।

ट्रंप ने कहा कि किसी अन्य देश द्वारा हमले की स्थिति में अमेरिका भारत का समर्थन करेगा।

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विवाद

प्रधानमंत्री के प्रेस वार्ता न करने पर उठते रहे हैं सवाल

इससे पहले भी प्रधानमंत्री के मीडिया से मुखातिब न होने पर सवाल उठते रहे हैं। प्रधानमंत्री की यूरोप और ओशिनिया यात्रा के दौरान भी स्थानीय मीडिया ने इस मुद्दे को उठाया था।

एम्स्टर्डम और ओस्लो में पत्रकारों ने विदेश मंत्रालय के राजनयिकों से इस बारे में सवाल पूछे थे।

नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग भी खासी चर्चा में थीं, जिन्होंने प्रधानमंत्री से सीधे पूछा था कि क्या वे 'दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस' से सवाल लेना चाहेंगे?

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