#NewsBytesExplainer: भारत-म्यांमार के साथ कर सकता है जमीन की अदला-बदली, क्या है पूरा मामला?
क्या है खबर?
ऐसी खबरें हैं कि भारत और म्यांमार मणिपुर से सटी अपनी सीमा के दशकों पुराने विवादित हिस्से के निपटारे के लिए संभावित जमीनी अदला-बदली पर विचार कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसके संकेत दिए हैं। उन्होंने खबरों की पुष्टि नहीं की लेकिन कहा, "सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनका निपटारा अभी तक नहीं हुआ है। उन क्षेत्रों पर बातचीत जारी है।"आइए समझते हैं पूरा विवाद क्या है।
बयान
विदेश मंत्रालय ने खबरों पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मामले से जुड़े सवाल पर कहा, "दोनों देशों की सीमा पर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जिनका निपटारा बाकी है और उन विशेष क्षेत्रों पर दोनों देशों में बातचीत चल रही है।"
हालांकि, सरकार ने आधिकारिक तौर पर किसी जमीन की अदला-बदली की पुष्टि नहीं की है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम लंबे समय से लंबित सीमा विवाद को सुलझाने में मददगार साबित हो सकता है।
सीमा
अब भारत-म्यांमार सीमा के बारे में जानिए
भारत और म्यांमार 1,643 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं, जो भारत के अरुणाचल प्रदेश (520 किलोमीटर), नागालैंड (215 किलोमीटर, मणिपुर (398 किलोमीटर) और मिजोरम (510 किलोमीटर) से होते हुए म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र और चिन राज्य में प्रवेश करती है।
ये सीमा 1967 में हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत निर्धारित की गई थी। हालांकि, अभी भी सीमा के कुछ हिस्सों को लेकर दोनों देशों में विवाद है।
प्रस्ताव
क्या है जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव?
अमेरिकी पत्रिका द डिप्लोमैट ने आधिकारिक दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा कि भारत सरकार मणिपुर की म्यांमार सीमा पर स्थित सीमा स्तंभ 65 और 68 के बीच सीमांकन को पूरा करने के लिए लगभग 1.4 वर्ग मील क्षेत्र के आदान-प्रदान के एक 'प्रस्ताव' की जांच कर रही है।
स्तंभ 65 और 68 के बीच की दूरी 2.8 किलोमीटर है।
प्रस्तावित जमीन मणिपुर के चंदेल जिले में स्थित है, जो म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र में काबाव घाटी से सटा है।
अदला-बदली
मणिपुर में होना है जमीन की प्रस्तावित अदला-बदली
मणिपुर में संवेदनशील क्षेत्रों में सीमा स्तंभ 64 और 68 के बीच मोलचम, स्तंभ 75 और 79 के बीच मोरेह और स्तंभ 88 और 95 के बीच चोरो खुनू क्षेत्र शामिल हैं।
भारत का कहना है कि म्यांमार के साथ कोई सीमा विवाद नहीं है, बल्कि केवल 9 अनसुलझे स्तंभ हैं, जिनका समाधान द्विपक्षीय तंत्र के जरिए किया जा रहा है।
मणिपुर सरकार ने साल 2000 में इसे लेकर एक कैबिनेट उप-समिति बनाई थी, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला।
चर्चा
म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान हुई थी चर्चा
रिपोर्ट में एक सरकारी अधिकारी के हवाले से कहा गया कि म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान सीमा का मुद्दा चर्चा में आया था।
अधिकारी ने दावा किया कि दोनों सरकारों के बीच चंदेल जिले के मोलचम में सीमा स्तंभ 65 और 68 के बीच 'सहायक स्तंभ' और कुछ नए स्तंभ लगाने की संभावना पर चर्चा हुई थी।
साथ ही मोलचम में सीमा को लेकर विदेश मंत्रालय के 2017 के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई थी।
विवाद
सीमा को लेकर कब-कब सामने आए हैं विवाद?
सीमा के विवादित हिस्सों को लेकर समय-समय पर विवाद होते रहे हैं।
2018 में खबर आई थी कि म्यांमार के लोगों और सेना के जवानों ने कामजोंग जिले के K अशांग खुलेन अजे गांव के निवासियों को नए घर बनाने से रोक दिया था।
2018 में ही तेंगनौपाल जिले के सीमावर्ती गांव क्वाथा खुनौ के निवासियों ने आरोप लगाया कि भारत सरकार ने सीमा के एक खंभे को 3 किलोमीटर अंदर मणिपुर में खिसका दिया है।
विरोध
मणिपुर में प्रस्तावित योजना का विरोध शुरू
द इम्फाल टाइम्स ने बताया कि मणिपुर अखंडता समन्वय समिति ने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि अगर राज्य का एक छोटा सा हिस्सा भी म्यांमार को सौंपा गया तो वो इसका कड़ा विरोध करेगी।
मैतेई नागरिक समाज संगठनों की संयुक्त संस्था कोकोमी ने कहा, "अगर खबर सही है और प्रस्ताव पर अमल किया जाता है, तो कोकोमी मूक दर्शक नहीं बनी रहेगी।"
संगठन ने चेतावनी दी कि सरकार को बिना सहमति फैसला लेकर आग से नहीं खेलना चाहिए।