NGO पर नई FCRA पाबंदियां, विदेशी फंडिंग के लिए देना होगा पूरा विवरण
केंद्र सरकार ने अब गैर-सरकारी संगठन (NGO) के लिए विदेशी फंडिंग के नियमों को और कड़ा कर दिया है। इन नए नियमों के तहत, अगर कोई भी NGO विदेश से पैसा लेना चाहता है, तो उसे अपनी गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताना होगा। उसे साफ-साफ बताना होगा कि वह सांस्कृतिक, सामाजिक या धार्मिक जैसे कौन से काम करेगा। उसकी ये गतिविधियां सरकार द्वारा तय की गई सूची के दायरे में ही रहनी चाहिए। ये बदलाव 22 जून, 2026 से लागू हो चुके हैं।
NGO को दाताओं और कामकाज का खुलासा करना होगा
NGO को अब यह भी बताना होगा कि वे देश के किन राज्यों या इलाकों में काम करेंगे। कुछ खास मामलों में, जैसे कि जब वे किसी बिचौलिये के जरिए पैसा लेते हैं या डोनर एडवाइस्ड फंड का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें अपने मुख्य विदेशी दाताओं का नाम भी बताना जरूरी होगा। अगर किसी NGO के प्रमुख सदस्य विदेशी नागरिक हैं (बशर्ते वे भारतीय मूल के न हों), तो उन्हें आमतौर पर मंजूरी नहीं मिलेगी, जब तक कि सरकार कोई खास छूट न दे। विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत पंजीकरण या नवीनीकरण करते समय NGO को अपने सोशल मीडिया हैंडल भी देने होंगे और हर साल अपनी गतिविधियों की पूरी रिपोर्ट भी सौंपनी होगी। अपने पंजीकरण को जारी रखने के लिए NGO को 2 साल के अंदर कम से कम 10 लाख रुपये का विदेशी दान खर्च करना होगा। इतना ही नहीं, अगर कोई NGO अपना काम बढ़ाना या अपना कार्यक्षेत्र बदलना चाहता है, तो उन्हें इसके लिए नया शुल्क भी देना पड़ेगा।