सिंधु जल संधि निलंबित होने के बाद भी सही तरह से नहीं हो रहा निदियों के पानी का उपयोग
भारत ने 17 महीने पहले सिंधु जल संधि को निलंबित तो कर दिया, लेकिन सिंधु, झेलम और चेनाब नदियों का पानी अभी तक ठीक से इस्तेमाल नहीं हो पाया है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पानी के इस्तेमाल के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा अभी तक तैयार ही नहीं हुआ है। दक्षिण एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल के समन्वयक हिमांशु ठक्कर बताते हैं कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को शुरू करने और पूरा करने में काफी समय और मेहनत लगती है।
पश्चिमी नदियों में भंडारण संधि की तय सीमा से कम
कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने भले ही इस संधि को एकतरफा निलंबित कर दिया था, लेकिन एक अंतरराष्ट्रीय अदालत अब भी इसे पूरी तरह वैध मानती है, जिस पर भारत अपनी असहमति जता चुका है। फिलहाल, इन पश्चिमी नदियों में पानी का भंडारण उतना नहीं हो पा रहा है, जितनी अनुमति इस संधि के तहत मिलती है। नए बांध परियोजनाएं अध्ययन, मंजूरी, पैसा जुटाने और निर्माण में देरी के चलते अटकी हुई हैं। इसके उलट, सिंचाई और बिजली के लिए बनी पूर्वी नदी परियोजनाएं, जैसे शाहपुरकांडी पर ज्यादा तेजी से काम चल रहा है।