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#NewsBytesExplainer: देश को मिलेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन; कैसे चलती है, आपको क्या फायदा होगा?
17 जुलाई को देश को पहली हाइ्ड्रोजन ट्रेन मिलेगी

#NewsBytesExplainer: देश को मिलेगी पहली हाइड्रोजन ट्रेन; कैसे चलती है, आपको क्या फायदा होगा?

लेखन आबिद खान
Jul 16, 2026
07:12 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। यह ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलेगी। यह ब्रॉड-गेज ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन-चालित ट्रेनों में से एक है और 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' की सफलता को दर्शाती है। इसी के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें होंगी। आइए इन ट्रेनों के बारे में जानते हैं।

हाइड्रोजन ट्रेन

सबसे पहले जानिए क्या होती है हाइड्रोजन ट्रेन

दरअसल, किसी भी ट्रेन को चलाने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। पहले ये ऊर्जा कोयले के जरिए दी जाती थी, जिसे बाद में बिजली और डीजल से दिया जाने लगा।

अब ट्रेन को यही ऊर्जा हाइड्रोजन के जरिए दी जाएगी।

यह न सिर्फ यात्रियों के लिए आरामदायक हैं, बल्कि इन ट्रेनों से डीजल और बिजली से चलने वाली ट्रेनों के मुकाबले प्रदूषण न के बराबर होता है। इससे ये पर्यावरण के लिए भी अनुकूल हैं।

चलने का तरीका

कैसे चलती है हाइड्रोजन ट्रेन?

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन को चलाने के लिए 1,200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल-सेल प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जो बिजली पैदा करेगी।

ट्रेन में एक बैटरी सिस्टम भी है, जिसे हाइड्रोजन फ्यूल सेल चार्ज करेगा। जब ट्रेन को ज्यादा बिजली की जरूरत होती है, तो बैटरी मदद करती है। कम जरूरत पर बैटरी खुद से चार्ज भी होती रहेगी।

हाइड्रोजन फ्यूल सेल रासायनिक अभिक्रिया द्वारा बिजली पैदा करते हैं, इसलिए कोई धुंआ या प्रदूषण नहीं होता।

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ऊर्जा

एक बार में तय कर सकेगी 250 किलोमीटर सफर

ट्रेन में लगभग 440 किलोग्राम हाइड्रोजन को 27 सिलेंडरों में स्टोर किया जाएगा। इस हाइड्रोजन का उत्पादन जिंद स्थित संयंत्र में किया जाएगा।

सेल के अंदर हाइड्रोजन हवा में मौजूद ऑक्सीजन के मिलकर अभिक्रिया करेंगे, जिससे बिजली पैदा होगी।

ट्रेन को खींचने वाले हर डिब्बे में 2400 किलोवाट क्षमता होगी। हर डिब्बे में 4 एकीकृत पावर पैक होंगे, जिनमें से एक 300 किलोवाट बिजली पैदा करेगा।

ट्रेन एक बार में लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।

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आंकड़े

ट्रेन से जुड़े आंकड़े

एक बार में ट्रेन में 2,600 यात्री सफर कर सकेंगे।

ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर करीब 2 घंटे में पूरा करेगी। रविवार को नहीं चलेगी।

10 कोच होंगे। हर कोच में 32 सीटें होंगी। एक सीट पर 3 यात्री बैठ सकेंगे।

एक कोच में करीब 300 यात्री सफर कर सकेंगे।

ट्रेन 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने में सक्षम है।

26 जून को ट्रायल के दौरान ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली थी।

स्टेशन

अब ट्रेन का समय और स्टेशन भी जान लीजिए

ये ट्रेन जिंद से सुबह 7:40 बजे निकलेगी और 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। वहां से सुबह 10:40 बजे रवाना होगी और दोपहर एक बजे जिंद पहुंचेगी।

ट्रेन रोजाना 2 चक्कर लगाएगी और लगभग 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। लगभग 2,600 यात्री इसमें सफर करेंगे।

रास्ते में यह जिंद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांबेना, ईशापुर खेरी, बुटाना, खंडराई, गोहाना, राभरा, लाठ, मोहना और बरवासनी समेत 12 स्टेशन पर रुकेगी।

परियोजना

परियोजना को लेकर कब-क्या हुआ?

2020-21 में जिंद-सोनीपत खंड को हाइड्रोजन ईंधन-सेल तकनीक में बदलने के लिए 136 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।

अप्रैल 2022 में इसके लिए हैदराबाद की कंपनी के साथ अनुबंध हुआ।

सितंबर 2022 में कंपनी ने हाइड्रोजन ईंधन-सेल प्रणाली की आपूर्ति के लिए कनाडा की एक कंपनी से साझेदारी की।

दिसंबर, 2025 में 10 कोचों वाली यह ट्रेन बनकर तैयार हो गई।

रेलवे बोर्ड ने 22 मई, 2026 को जिंद-सोनीपत खंड पर इसके संचालन की अनुमति दे दी।

वजह

जिंद और सोनीपत को क्यों चुना गया? 

इस मार्ग पर पहले से डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेनें चल रही थीं, जिससे नया रेल सेट बनाने के बजाय मौजूदा रैक को ही हाइड्रोजन रैक में आसानी से बदला जा सकता था।

यह बिना इलेक्ट्रिफिकेशन वाला हिस्सा ट्रेन को हर दिन 2 चक्कर लगाने के लिए अनुकूल है।

3,000 किलोग्राम भंडारण क्षमता वाले हाइड्रोजन उत्पादन और ईंधन संयंत्र को जिंद में स्थापित करना भी आसान था।

इन जगहों की दिल्ली से नजदीकी भी एक कारण थी।

योजना

पहाड़ी-विरासती मार्गों पर 35 हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की है योजना

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' पहल के तहत नियमित सेवा में शामिल हो जाएगी।

इस परियोजना के तहत विरासत, पहाड़ी और अन्य गैर-विद्युतीकृत मार्गों पर 35 हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें शुरू करने की तैयारी है। इसके बाद नीलगिरी, दार्जिलिंग और कांगड़ा जैसे विरासत और पहाड़ी मार्गों पर हाइड्रोजन ट्रेनों का काम शुरू होगा।

रेलवे के अनुसार, इन रूट की अनुमानित लागत 80 करोड़ रुपये है और जमीनी बुनियादी ढांचे के लिए 70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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