भारत ने निकाला 'चिकन नेक' का तोड़; पूर्वोत्तर तक सड़क, रेलवे और समुद्री मार्ग का जाल
क्या है खबर?
देश की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर या 'चिकन नेक' के वैकल्पिक उपाय पर सरकार जोरों-शोरों से काम कर रही है। रणनीतिक रूप से अहम और केवल 20 किलोमीटर चौड़े इस इलाके में किसी भी तरह की बाधा उत्तर-पूर्वी राज्यों में लोगों के जीवन और सैन्य आपूर्ति को खतरे में डाल सकती है। इसी वजह से इसके विकल्पों पर काम चल रहा है। आइए जानते हैं सरकार क्या-क्या कदम उठा रही है।
कलादान मार्ग
कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट
सरकार कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इसके लिए प्रारंभिक समझौते पर 2008 में हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह पूर्वोत्तर भारत को म्यांमार होते हुए बंगाल की खाड़ी से जोड़ने के लिए बनाया गया है। इसके जरिए माल कोलकाता से म्यांमार के सित्वे तक पहुंचाया जाएगा फिर नदी और सड़क मार्ग से मिजोरम भेजा जाएगा।
यह बांग्लादेश के बिना पूर्वोत्तर तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग होगा।
त्रिपुरा
त्रिपुरा तक पहुंचने के लिए मिले 2 रास्ते
त्रिपुरा तक पहुंचने के लिए अब 2 रास्ते हैं। नवंबर, 2023 में अगरतला-अखाउरा रेलवे लिंक का उद्घाटन हुआ था। यह त्रिपुरा को बांग्लादेश से सीधा संपर्क प्रदान करता है और परिवहन नेटवर्क के माध्यम से उसके बंदरगाहों तक पहुंच प्रदान करता है।
इसी के साथ फेनी नदी पर मैत्री सेतु का उद्घाटन 2021 में किया गया, जो त्रिपुरा के सब्रूम को बांग्लादेश के रामगढ़ से जोड़ता है। यह पुल चटोग्राम बंदरगाह से लगभग 80 किलोमीटर दूर है।
चटोग्राम
चटोग्राम और मोंगला के जरिए बांग्लादेशी बंदरगाहों तक पहुंच
भारत ने बांग्लादेश के चटोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के जरिए माल की आवाजाही को लेकर समझौते भी किए हैं। 2015 में इस संबंध में बातचीत शुरू हुई थी और 2018 में एक औपचारिक समझौता किया गया। इसके बाद 2023 में एक स्थायी पारगमन आदेश जारी किया गया।
इसक जरिए बंगाल की खाड़ी से माल समुद्र, नदी, रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए पूर्वोत्तर में भेजा जा सकता है।
भारत-म्यांमार-थाईलैंड राजमार्ग
म्यांमार और थाईलैंड तक राजमार्ग
भारत म्यांमार और थाईलैंड के बीच एक राजमार्ग पर भी काम कर रहा है। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों को म्यांमार और थाईलैंड से जोड़ना है, जिससे दक्षिणपूर्व एशिया की ओर एक सड़क मार्ग स्थापित हो सके।
यह केवल पूर्वोत्तर के लिए एक वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग नहीं, बल्कि क्षेत्र को आसियान बाजारों के लिए प्रवेश द्वार भी बना सकता है।
इसके जरिए पूर्वोत्तर तक म्यांमार और दक्षिण पूर्व एशिया के जरिए पहुंच मिलेगी।
बयान
गृह मंत्री बोले- चिकन नेक की सुरक्षा के लिए 3 बेस बनाए
गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के दौरे पर हैं।
यहां सशस्त्र सीमा बल (SSB) के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले इस कॉरिडोर की सुरक्षा के महत्व को समझा है। बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के चोपड़ा, बिहार के किशनगंज और असम के धुबरी में पहले ही बेस बनाए जा चुके हैं। बंगाल सरकार ने 560 एकड़ जमीन सौंप दी है।"
चिकन नेक
अब 'चिकन नेक' के बारे में जानिए
'चिकन नेक' को सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है।
60 किलोमीटर लंबा और 20 किलोमीटर चौड़ा यह कॉरिडोर पूर्वोत्तर के 7 राज्यों को भारत के साथ जोड़ता है। यह भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से सटा हुआ है।
यह इलाका रणनीतिक रूप से काफी अहम है, क्योंकि अगर इस क्षेत्र में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है तो पूरे पूर्वोत्तर भारत का बाकी देश से संपर्क टूट सकता है। यही वजह है कि भारत इसे लेकर बहुत संवेदनशील रहता है।