भारत ने रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम के लिए 3-सूत्रीय प्रस्ताव रखा- रिपोर्ट
क्या है खबर?
भारत ने रूस और यूक्रेन के बीच 3-सूत्रीय युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमलों को कम करना, काला सागर के माध्यम से जरूरी वस्तुओं की आवाजाही को बनाए रखना और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा करना है। न्यूज18 ने ये जानकारी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सितंबर में जब कीव का दौरा किया था, तब यह प्रस्ताव रखा गया था।
रिपोर्ट
भारत के प्रस्ताव में क्या-क्या है?
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित युद्धविराम में 3 उपायों का जिक्र है।
- ऊर्जा सुविधाओं और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमले रोके जाए।
- काला सागर बंदरगाहों के माध्यम से अनाज और ऊर्जा की निरंतर आवाजाही जारी रहे।
- काला सागर में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर हो रहे हमलों को रोका जाए।
इस प्रस्ताव का उद्देश्य संघर्ष के कई क्षेत्रों को एक साथ संबोधित करना है, जिसमें बुनियादी ढांचे पर हमले और समुद्री व्यापार में व्यवधान शामिल हैं।
भारत
दूसरे प्रस्तावों से किस तरह अलग है भारत का प्रस्ताव?
इससे पहले मिस्र, तुर्की और अमेरिका ने भी यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए प्रस्ताव पेश किए हैं।
मिस्र और तुर्की के प्रस्तावों में मुख्य रूप से जहाजों पर हमले रोककर अनाज की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
वहीं, अमेरिका के प्रस्ताव में ऊर्जा अवसंरचना पर हमले रोकने का आह्वान था।
भारत का प्रस्ताव ज्यादा व्यापक है, क्योंकि यह बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षा उपायों को शामिल करता है।
यूक्रेन
यूक्रेन ने प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की
यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने पुष्टि की कि कीव को नई दिल्ली से ऐसा प्रस्ताव मिला है। उन्होंने इसे युद्ध खत्म करने के उद्देश्य से की गई 4 अंतरराष्ट्रीय पहलों में सबसे व्यापक बताया।
उन्होंने कहा, "कीव युद्धविराम के विभिन्न प्रारूपों पर विचार करने के लिए तैयार है, लेकिन किसी भी समझौते में न केवल युद्ध अभियानों बल्कि ऊर्जा और बंदरगाह अवसंरचना पर हमलों और काला सागर की स्थिति को भी शामिल किया जाना चाहिए।"
विदेश मंत्री
जयशंकर ने कहा था- भारत अब केवल पैरवी तक सीमित नहीं
हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत अब केवल पैरवी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि लिए मॉस्को और कीव के साथ व्यावहारिक बातचीत कर रहा है।
दिल्ली में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में उन्होंने कहा था, "नई दिल्ली ने हाल के महीनों में मॉस्को और कीव दोनों के साथ बातचीत की है, जिसमें काला सागर में जहाजों की सुरक्षा से लेकर ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों को रोकने तक के प्रस्तावों पर चर्चा हुई है।"