मिसाइल खतरों से निपटने के लिए अंतरिक्ष में निगरानी प्रणाली स्थापित कर रहा भारत
क्या है खबर?
मिसाइल खतरों से निपटने के लिए भारत अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणालियों को स्थापित करने का काम कर रहा है। ये प्रणालियां कुछ ही सेकंड में मिसाइल दागे जाने का पता लगा लेंगी, जिससे उन्हें नष्ट करना ज्यादा तेजी से संभव हो सकेगा। इस संबंध में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने जून में वायुमंडल के बाहर और भीतर दोनों जगह से आ रही मिसाइलों को रोकने का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था।
अहमियत
कितना अहम है ये कदम?
दरअसल, फिलहाल भारत रडार आधारित प्रणाली से मिसाइलों को रोकता है। इस प्रक्रिया में मिसाइल के पथ का आकलन करने और फिर फैसला लेने के लिए सीमित समय होता है। आमतौर पर ये प्रणाली मिसाइल के अंतिम चरण के दौरान उसे निष्क्रिय कर पाती है।
अंतरिक्ष आधारित प्रणाली मिसाइल दागे जाने के पहले चरण से ही काम शुरू कर देती है। इससे मिसाइल को निष्क्रिया करने के लिए ज्यादा समय मिलता है।
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
फर्स्टपोस्ट से बात करते हुए अंतरिक्ष खुफिया कंपनी दिगंतारा के संस्थापक अनिरुद्ध शर्मा ने कहा, "अंतरिक्ष आधारित सेंसरों के माध्यम से कुछ ही सेकंडों में मिसाइल प्रक्षेपण का पता लगाने से आकलन करने, पथ को समझने और जवाबी कार्रवाई शुरू करने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। हाइपरसोनिक हथियारों, ICBM और तीव्र हमले की क्षमताओं से भरे इस परिदृश्य में निर्णय लेने में लगने वाले समय को कम करना एक रणनीतिक जरूरत है।"
भिन्नता
रडार से कितनी अलग है अंतरिक्ष आधारित प्रणाली?
अंतरिक्ष आधारित प्रणाली मिसाइल को दागे जाने के दौरान निकलने वाली ऊर्जा को ट्रैक कर सकती है। यहां पर रडारों की क्षमता सीमित होती है, क्योंकि पृथ्वी की वक्रता के कारण मिसाइल के प्रक्षेपण स्थल जमीन के करीब और सैकड़ों किलोमीटर दूर होते हैं।
इसके बाद कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क को चेतावनी भेजी जाती है, जो मिसाइल के प्रक्षेपण स्थान, उड़ान की दिशा और प्रारंभिक पथ के बारे में जानकारी देता है।
ऑपरेशन सिंदूर
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान महसूस हुई जरूरत
इस प्रणाली की जरूरत 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान महसूस हुई। दरअसल, तब पाकिस्तान की एक मिसाइल को भारतीय वायुसेना ने हरियाणा के सिरसा के ऊपर मार गिराया था। ये मिसाइल दिल्ली की ओर बढ़ रही थी और अपने लक्ष्य से एक या 2 मिनट ही दूर थी।
भारत का मानना है कि ये प्रणाली पाकिस्तान की फतेह या शाहीन जैसी मिसाइलों को खतरे के अंतिम चरण में पहुंचने से पहले ही नष्ट करने में कारगर साबित हो सकती है।