भारत की 2047 तक परमाणु ऊर्जा विस्तार योजना, 15 लाख करोड़ रुपये की जरुरत
भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 8.8 GW से बढ़ाकर 100 GW करने का लक्ष्य रखा है। इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए 15 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश की जरूरत पड़ेगी।
इस काम को पूरा करने के लिए निजी कंपनियों को भी आगे आकर हाथ बंटाना होगा। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का मानना है कि क्षमता में यह बड़ी बढ़ोतरी देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहद अहम है।
CEA के घनश्याम प्रसाद ने परमाणु ऊर्जा की विश्वसनीयता पर दिया जोर
परमाणु ऊर्जा को ऐसे समय में एक स्थिर और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है, जब सौर और पवन ऊर्जा से बिजली उपलब्ध नहीं हो पाती। ऐसा इसलिए है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी अभी भारत की कुल बिजली का लगभग 29.2 प्रतिशत हिस्सा जरूर है, लेकिन यह हमेशा एक जैसी भरोसेमंद नहीं होती।
CEA के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने इस बारे में कहा, "परमाणु ऊर्जा एक विश्वसनीय स्रोत है... यह देश की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बहुत जरूरी है।"
इस योजना के तहत 2030-31 तक 22 GW का आंकड़ा छूने और फिर इसे लगातार बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों की सक्रिय भागीदारी होगी।