अप्रैल 2027 से हर 100 सेंकड में बनेगी एक स्वदेशी AK-203 राइफल
भारत ने अपनी पहली स्वदेशी AK-203 'शेर' राइफल पेश कर दी है, जिसे उत्तर प्रदेश के कोरवा में IRRPL प्लांट में बनाया गया है। यह उपलब्धि विदेशी आयात पर हमारी निर्भरता कम करेगी और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बहुत बढ़ावा देगी।
इस प्रोजेक्ट ने अगस्त 2023 में एक अहम पड़ाव पार किया था, तब इसमें केवल 5 प्रतिशत भारतीय पुर्जे इस्तेमाल हुए थे। वहीं, अगस्त 2026 तक पहली पूरी तरह स्वदेशी AK-203 राइफल का सफल परीक्षण किया गया।
IRRPL ने लगभग 70,000 राइफलें डिलीवर कीं
AK-203 की इस यात्रा में देश भर से लगभग 76 छोटे वेंडरों को साथ लाया गया, जिनमें से कई उत्तर प्रदेश के मैन्युफैक्चरिंग हब से हैं। हर राइफल की क्वालिटी जांचने के लिए लगभग 70 राउंड फायर किए जाते हैं, जबकि पहली पूरी तरह भारतीय AK-203 राइफल का 3,000 राउंड का लगातार फायरिंग टेस्ट भी किया गया।
IRRPL अब तक करीब 70,000 राइफलें दे चुका है। अप्रैल 2027 से उनका लक्ष्य हर 100 सेकंड में एक राइफल बनाने का है। यह प्रोजेक्ट अमेठी के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। साथ ही, यह निर्यात और भविष्य में कलाश्निकोव परिवार के और भी हथियार बनाने की तैयारी कर रहा है।