LOADING...
WHO ने इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया, भारत ने जारी की चेतावनी
इबोला वायरस को WHO ने अंतरराष्ट्रीय चिंता का स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है

WHO ने इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया, भारत ने जारी की चेतावनी

लेखन आबिद खान
May 24, 2026
10:56 am

क्या है खबर?

इबोला वायरस को लेकर स्थिति खराब होती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वायरस के लगातार प्रसार के बीच इसे अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इसके बाद कई देशों ने एहतियाती कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। भारत ने भी अपने नागरिकों को चेतावनी जारी कर कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की कोई भी गैर-जरूरी यात्रा न करने की सलाह दी है।

भारत

भारत ने क्या चेतावनी दी?

भारत सरकार ने कहा, "कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और अन्य प्रभावित देशों में बदलती स्थिति को देखते हुए और WHO की सिफारिशों के अनुरूप, भारत सरकार अपने सभी नागरिकों को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह देती है।" यात्रा से बचने के अलावा सरकार ने इन देशों में रहने वाले नागरिकों को जरूरी एहतियाती उपाय करने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करने की भी सलाह दी है।

देश

वायरस से 10 अफ्रीकी देशों के प्रभावित होने का खतरा

अफ्रीकी संघ की स्वास्थ्य एजेंसी ने चेतावनी दी कि यह वायरस दक्षिण अफ्रीकी गणराज्य और युगांडा के अलावा कम से कम 10 अन्य देशों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। एजेंसी ने कहा, "हमारे पास 10 देश खतरे में हैं। इनमें अंगोला, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो गणराज्य, इथियोपिया, केन्या, रवांडा, दक्षिण सूडान, तंजानिया और जांबिया शामिल हैं।" अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) ने भी इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है।

Advertisement

मौतें

लगातार बढ़ रहे संक्रमितों का आंकड़े

कांगो के 3 प्रांतों में 867 संदिग्ध मामलों में से 204 लोगों की मौत हो चुकी है। ये 2014 से 2016 तक पश्चिम अफ्रीका में फैली महामारी के बाद इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन गया है। वहीं, WHO के आंकड़ों के अनुसार, 750 संदिग्ध मामलों में से 177 लोगों की मौत हो गई है। इस प्रकोप के पीछे वायरस के बंडीबुग्यो स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसके लिए कोई टीका या इलाज मौजूद नहीं है।

Advertisement

इबोला

इबोला वायरस के बारे में जानिए

इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब कांगो) में इसके मामले मिले थे। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है। कांगो में कई बार इसके मामले सामने आ चुके हैं। अब ये इसका 17वां प्रकोप है। 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में इबोला से 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

Advertisement