भारत में मुर्दाघर अब नहीं रहेंगे उपेक्षित, सरकार ने जारी किए देश के पहले राष्ट्रीय मानक
भारत ने पहली बार मुर्दाघर और पोस्टमार्टम सुविधाओं के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम मानक जारी किए हैं। इन मानकों का उद्देश्य है कि ये जगहें ज्यादा सुरक्षित, साफ-सुथरी और व्यवस्थित बन सकें। इन्हें स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के तहत काम करने वाली नेशनल काउंसिल फॉर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट ने तैयार किया है। इन मानकों में कोल्ड स्टोरेज, शवों की पहचान, कर्मचारियों के नियम और पोस्टमार्टम कक्ष तक, सभी जरूरी बातें शामिल हैं।
मुर्दाघर के लिए स्टोरेज और निरीक्षण के नए नियम
मुर्दाघरों में अब कम से कम 4 शवों के लिए 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले कोल्ड स्टोरेज का इंतजाम करना होगा। कानूनी मामलों और सामान्य मौतों के लिए अलग-अलग जगहें तय की गई हैं और हर शव पर एक यूनीक सीरियल नंबर लगाया जाएगा। इन सुविधाओं में 4,000 स्क्वायर फीट के बड़े पोस्टमार्टम ब्लॉक, अलग प्रवेश द्वार, अंतिम संस्कार या अनुष्ठान के लिए जगह, चौड़े कॉरिडोर, अच्छा वेंटिलेशन और मक्खी-मच्छर से बचाव वाली खिड़कियां शामिल होनी चाहिए। मुर्दाघर अब न तो बेसमेंट में बनाए जाएंगे और न ही अस्पताल के कचरा क्षेत्रों के पास। स्टाफ की नियुक्ति से जुड़े नियम भी अब ज्यादा स्पष्ट कर दिए गए हैं और नियमित निरीक्षण के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इन सभी मानकों का ठीक से पालन हो रहा है।