कैंसर मरीजों को बड़ी राहत, सरकार तय करेगी दवाओं के दाम
कैंसर के मरीजों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत सरकार बहुत जल्द कई जीवनरक्षक कैंसर दवाओं के दामों पर नई सीमा तय करने का ऐलान करने वाली है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले इन फैसलों का ब्योरा साझा करेंगे।
सरकार का मुख्य मकसद दवा खुदरा विक्रेताओं के खरीद मूल्य और मरीजों से वसूले जाने वाले दामों के बीच के बड़े अंतर को खत्म करना है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस गंभीर समस्या पर अपनी चिंता जाहिर की थी।
भारतीय अधिकारी कीमतों की जांच का दायरा बढ़ाना चाहते हैं
साल 2019 में, सरकार ने 42 गैर-सूचीबद्ध कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत पर सीमित कर दिया था। इससे ये दवाएं काफी सस्ती हो गईं। इन दवाओं को उन 57 कैंसर रोधी दवाओं की सूची में जोड़ा गया था, जिनकी कीमतें पहले से ही तय थीं और वे नियंत्रित दवाओं की श्रेणी में आती थीं।
अब प्रधानमंत्री कार्यालय की कड़ी निगरानी के बीच, अधिकारी इन मूल्य नियंत्रणों का दायरा और बढ़ाना चाहते हैं। जानकारों का मानना है कि दवाओं की ऊंची कीमतें सिर्फ कंपनियों के मुनाफे की वजह से नहीं हैं, बल्कि सप्लाई चेन की लागत भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों में जबरन दवा खरीदारी की जांच शुरू की
इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट इस मामले की भी पड़ताल कर रहा है कि कुछ निजी अस्पताल मरीजों को सिर्फ अपनी फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इन आरोपों की जांच की जा रही है। यह भी एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि भारत जीवनरक्षक कैंसर उपचार को सभी के लिए सुलभ बनाने और उचित दामों पर उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।