भारत पर 'हीट स्टॉर्म' का महासंकट, स्वास्थ्य-खेती-पानी पर होगा सीधा असर
भारत को अब एक नए और बड़े जलवायु संकट का सामना करना पड़ रहा है, जिसे 'हीट स्टॉर्म' कहा जा रहा है। ये आम गर्मी की लहरों से कहीं ज्यादा बड़े और लंबे होते हैं। जहां सामान्य गर्मी की लहरें आती-जाती रहती हैं, वहीं 'हीट स्टॉर्म' में कई हफ्ते या महीनों तक बहुत बड़े इलाके में भीषण गर्मी पड़ती है।
जानकारों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसे 'हीट स्टॉर्म' अब और आम होते जा रहे हैं। इसका सीधा और गंभीर खतरा देश के लोगों की सेहत, किसानों की फसल और पानी के भंडारों पर मंडरा रहा है।
वैज्ञानिकों की सलाह- हीट इमरजेंसी से निपटने के लिए नई रणनीति की जरूरत
वैज्ञानिक बताते हैं कि 'हीट स्टॉर्म' बढ़ने की वजह ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन है। 1960 से अब तक वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा 30 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ गई है। इसी वजह से अत्यधिक गर्मी वाले इलाकों का दायरा भी बारह गुना से ज़्यादा फैल गया है।
भारत जैसे देश को इसका सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जहां लोगों के स्वास्थ्य, खेती-किसानी और पानी के संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसलिए मौसम और जलवायु विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए हमें गर्मी से जुड़ी आपात स्थितियों (हीट इमरजेंसी) से निपटने के अपने तरीकों पर फिर से विचार करना होगा।