बिजली संकट गहराया, 5 प्रतिशत आयातित कोयले से भारत को मिलेगी राहत?
भारत अपने बिजलीघरों को स्थानीय कोयले के साथ 5 प्रतिशत तक आयातित कोयला मिलाने की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। सरकार इस पर विचार इसलिए कर रही है क्योंकि कोयले की कमी से बिजली की कीमतें कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हें। हालांकि, इस कदम से आयात पर निर्भरता कम करने के हालिया प्रयासों को झटका लग सकता है।
कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी ने भारतीय बिजलीघरों को मुश्किल में डाला
मई महीने से इंडोनेशिया, रूस और दक्षिण अफ्रीका में कोयले के दाम तेजी से बढ़े हें। इंडोनेशिया में कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़ी हें, रूस में 14 प्रतिशत अधिक और दक्षिण अफ्रीका में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है। इन कीमतों के बढ़ने की वजह बिजली की बढ़ी हुई खपत और मानसून की कम बारिश है, जिसका असर हाइड्रोपावर उत्पादन पर पड़ा है। फिलहाल, लगभग 40 प्रतिशत कोयला आधारित बिजलीघरों के पास 3 दिन से भी कम का कोयला बचा है। इसी वजह से सरकार बिजली की आपूर्ति बनाए रखने के लिए कोयला आयात करने पर विचार कर रही है।