भारत कैसे खत्म करेगा 60 प्रतिशत तेल आयात की निर्भरता? उठाया यह बड़ा कदम
भारत सरकार 'खाद्य तेलों पर राष्ट्रीय मिशन- ऑयल पाम' (NMEO-OP) के तहत देश में ही पाम तेल के उत्पादन को बढ़ाने के लिए 11,040 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इस मिशन का मकसद महंगे आयात पर अपनी निर्भरता कम करना है। साथ ही 2030-31 तक 28 लाख टन कच्चा पाम तेल देश में ही पैदा करना है, ताकि हम अपनी ज्यादा जरूरतें खुद ही पूरी कर सकें।
भारत करता है 60 प्रतिशत खाद्य तेलों का आयात
फिलहाल, भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से मंगाता है। साल 2024-25 में तो अकेले वनस्पति तेलों के आयात पर करीब 18.3 अरब डॉलर (लगभग 1.74 लाख करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है, जिनमें पाम तेल का आयात सबसे ज्यादा होता है। इस दिशा में आंध्र प्रदेश सबसे आगे है, जो देश के कुल पाम तेल का 83 प्रतिशत उत्पादन करता है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने साल 2025-26 में 30,364 हेक्टेयर जमीन पर पाम तेल के नए बागान लगाने का लक्ष्य रखा है। किसान, गोदरेज एग्रोवेट और पतंजलि फूड्स जैसी बड़ी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि उन्हें अपनी उपज का अच्छा दाम मिले और जरूरी सहायता भी मिल सके।