भारत का शिक्षा पर खर्च बढ़ा, फिर भी कुछ BRICS देशों से पीछे
भारत ने सार्वजनिक शिक्षा पर अपना खर्च बढ़ा दिया है। साल 2016 में यह GDP का 1.2 प्रतिशत था, जो 2023 में बढ़कर 4.1 प्रतिशत हो गया है। इस मामले में भारत ने चीन और रूस जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।
हालांकि, वह अभी भी दक्षिण अफ्रीका (10.5%) और ब्राजील (4.9%) से पीछे है। शहरी परिवार भी अब पढ़ाई पर ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। साल 2000 में वे अपनी कमाई का 4.3 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करते थे, जो 2025 तक 6 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं, ग्रामीण परिवार भी 1.9 से बढ़कर 3.2 प्रतिशत खर्च करने लगे हैं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पढ़ाई-लिखाई अब सभी के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बनती जा रही है।
भारत: 43 प्रतिशत कामकाजी लोग प्राथमिक सेक्टर में
शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ने के बावजूद, पिछले साल भारत के करीब आधे (43 प्रतिशत) कामकाजी लोग अभी भी प्राथमिक सेक्टर (जैसे खेती, मछली पालन) में ही काम कर रहे थे। यह आंकड़ा चीन या दक्षिण अफ्रीका की तुलना में कहीं ज्यादा है।
हाल ही में हुई BRICS देशों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक में, नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रेनिंग प्रोग्राम्स को आज के नौकरी बाजार के हिसाब से ज्यादा प्रासंगिक बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि वोकेशनल स्कूलों और इंडस्ट्री के बीच तालमेल को मजबूत किया जाए, जिससे युवाओं को उनकी काबिलियत के हिसाब से नौकरी मिल सके।