गन्ने के रस से एथेनॉल पर रोक: चीनी बचाने को सरकार ने उठाया बड़ा कदम
देश
भारत सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। साल 2026-27 के सीजन से देश में गन्ने के रस, शुगर, सिरप या बी-हेवी मोलासेस का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसकी जगह तेल कंपनियों को अब सी-हेवी मोलासेस, खराब अनाज, FCI से मिलने वाले अतिरिक्त चावल और मक्का जैसी चीजों से एथेनॉल बनाना होगा। यह फैसला देश में चीनी के कम उत्पादन और खुदरा बाजार में इसकी बढ़ती कीमतों को देखते हुए लिया गया है।
310 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान
सरकार का अनुमान है कि 2025-26 के सीजन में देश में कुल 310 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा। एथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीजों में बदलाव करके, सरकार ईंधन की जरूरतों और खाद्य सुरक्षा, दोनों के बीच संतुलन बनाना चाहती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में न तो ईंधन की कमी हो और न ही लोगों को खाने की चीजों की किल्लत झेलनी पड़े।