भारत की थाली का अनकहा सच, 90 लाख टन पाम तेल पर टिकी हमारी रसोई
भारत अपनी रसोई का काम चलाने के लिए पाम तेल पर बहुत ज्यादा निर्भर रहता है। एक आम तेल वर्ष में हम 90 लाख टन से भी ज्यादा पाम तेल बाहर से मंगाते हैं, जो हमारे कुल खाद्य तेल आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है।
साल 2024 में, देश ने सिर्फ सर्टिफाइड पाम तेल ही 4.31 लाख टन मंगवाया है। पाम तेल सिर्फ खाने-पीने की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत अहम है।
भारतीय खाद्य तेल बाजार में पाम तेल का दबदबा
भारत में जितना भी खाद्य तेल इस्तेमाल होता है, उसमें 38 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पाम तेल का है। गांवों में इसकी बहुत मांग रहती है क्योंकि यह सस्ता होता है। जहां सूरजमुखी का तेल 160 से 170 रुपये प्रति किलोग्राम मिलता है, वहीं पाम तेल 130 से 145 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल जाता है।
सरकार साल 2030 तक देश में पाम तेल का उत्पादन बढ़ाना चाहती है, ताकि बाहर से इसे कम मंगाना पड़े। हालांकि, अभी भी ज्यादातर पाम तेल इंडोनेशिया और मलेशिया से ही आता है। भारत अब ऐसा पाम तेल भी ज्यादा आयात करने की कोशिश कर रहा है, जो पर्यावरण का ध्यान रखकर बनाया गया हो, ताकि हम दुनिया के मानकों पर खरे उतर सकें और व्यापार भी स्थिर बना रहे।