2033 तक देश में 5 स्वदेशी स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर्स शुरू करने का लक्ष्य
भारत ने साल 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर्स (SMRs) को विकसित करने और चालू करने की योजना बनाई है। आप इन्हें छोटे और कॉम्पैक्ट न्यूक्लियर पावर स्टेशन समझ सकते हैं।
BARC इनमें से 3 प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर रहा है। इनमें एक 220-मेगावाट का 'भारत SMR', बिजली के लिए एक छोटा 55-मेगावाट वाला मॉडल और हाइड्रोजन बनाने के लिए एक हाई-टेंपरेचर रिएक्टर शामिल है। ये सभी देश के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन का हिस्सा हैं।
SHANTI एक्ट 2025 ने न्यूक्लियर सेक्टर में निजी भागीदारी के दरवाजे खोले
यह योजना सिर्फ नई तकनीक को अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सही जगह पर लगाना भी उतना ही जरूरी है। बड़े रिएक्टर्स को नई जगहों पर स्थापित किया जाएगा, वहीं SMRs ऐसे इलाकों में लगाए जाएंगे जहां पहले कोयले या तेल से चलने वाले पुराने बिजली घर थे या फिर जो इलाके बिजली ग्रिड से दूर हैं।
इस योजना का एक बड़ा मकसद भारत के विशाल थोरियम भंडारों का सही तरीके से इस्तेमाल कर उन्हें भविष्य के रिएक्टर्स के लिए ईंधन में बदलना है। इसके साथ ही, 2025 में पास हुए SHANTI एक्ट के तहत अब निजी कंपनियां भी परमाणु ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भाग ले सकेंगी। साथ ही, लंबे समय की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के मकसद से सोडियम-कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर्स पर शोध को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।