होटल-रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज की मनमानी खत्म, सरकार का ग्राहकों के हक में बड़ा फैसला
भारत सरकार ने होटलों और रेस्टोरेंट को साफ निर्देश दिए हैं कि वे ग्राहक की अनुमति के बिना बिल में अपने आप सेवा शुल्क न जोड़ें। उपभोक्ता मामलों के विभाग का कहना है कि स्वचालित तरीके से ऐसा शुल्क लगाना ग्राहकों के अधिकारों का उल्लंघन है। हाल ही में इस तरह की कई शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।
टिप देने के लिए नहीं किया सकता मजबूर
अधिकारियों ने साफ किया है कि टिप देना पूरी तरह से ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है और किसी को भी इसके लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। दिल्ली हाई कोर्ट के एक हालिया फैसले के बाद यह बात फिर से दोहराई गई है। कोर्ट ने 2022 के उन नियमों का समर्थन किया था, जिनमें अनिवार्य सेवा शुल्क पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने तब कहा था कि ये शुल्क ग्राहकों के साथ अन्याय करता हैं और उन्हें भ्रमित करती हैं, क्योंकि वे टैक्स जैसी दिखती हैं।
स्वैच्छिक शुल्क लगाने पर चायोस पर 50,000 रुपये का जुर्माना
नियमों का उल्लंघन करने वाले 60 से भी ज्यादा संस्थानों को अब तक नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें चायोस भी शामिल है, जिस पर कथित तौर पर छिपे हुए स्वैच्छिक शुल्क जोड़ने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि वह ग्राहकों की शिकायतों को पूरी गंभीरता से ले रही है और उन्हें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाकर उन पर कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है।