केंद्र सरकार ने शुरू की 'समुद्र मंथन' पहल, तेल-गैस की खोज के लिए खर्च होंगे 84,000 करोड़ रुपये
भारत सरकार ने 'समुद्र मंथन' नाम की एक बड़ी पहल शुरू की है। इसके तहत समुद्र में तेल और गैस खोजने के लिए 84,084 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य मकसद ऊर्जा के लिए दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता को कम करना है। अभी हालात ये हैं कि भारत अपनी जरूरत का 88 प्रतिशत कच्चा तेल और आधी प्राकृतिक गैस विदेश से ही मंगाता है। सरकार का लक्ष्य है कि देश में ही तेल और गैस का उत्पादन बढ़ाया जाए ताकि बाहर से होने वाले भारी आयात पर हमारी निर्भरता घट सके।
समुद्र मंथन से 60 अपतटीय कुओं की खुदाई में मिलेगी मदद
आने वाले 5 सालों में इस योजना के तहत समुद्र में कुल 60 गहरे कुएं खोदे जाएंगे। इन कुओं की खुदाई के खर्च का 50 प्रतिशत तक या अधिकतम 650 करोड़ रुपये प्रति कुएं का खर्च सरकार खुद उठाएगी। सिर्फ कुएं ही नहीं, सरकार समुद्र के भीतर बिछाई जाने वाली पाइपलाइन और प्रोसेसिंग सुविधाएं जैसे साझा बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में भी बड़ा निवेश कर रही है। कुएं खोदने के लिए 43,200 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जबकि नए बेसिन (इलाकों) की पहचान और भूकंपीय डाटा (सेस्मिक डेटा) जुटाने के लिए 28,534 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार की उम्मीद है कि यह योजना दुनिया भर के निवेशकों को भारत में तेल और गैस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आकर्षित करेगी।