बिजली की बढ़ती मांग पर बड़ा फैसला, 100 से ज्यादा कोयला संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने के आदेश
भारत ने 100 से ज्यादा कोयला बिजली संयंत्रों को 1 अक्टूबर से पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश दिया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि गर्म मौसम और अल नीनो जलवायु घटना के चलते बिजली की मांग में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। फिलहाल, देश के लगभग 40 प्रतिशत कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के पास ईंधन का स्टॉक गंभीर रूप से कम है।
बिजली के आदेश से स्टील और एल्यूमीनियम उद्योग प्रभावित
इस निर्देश का सीधा असर स्टील और एल्यूमीनियम जैसे बड़े उद्योगों पर पड़ेगा। वेदांता, टाटा स्टील और हिंडाल्को जैसी कंपनियां इन कैप्टिव बिजली संयंत्रों से ही अपनी जरूरत की बिजली लेती हैं। अगर ये संयंत्र अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली बनाते हैं, तो उन्हें यह अतिरिक्त बिजली खुले बाज़ार में बेचनी होगी।
साथ ही, अब उत्पादन और कोयले के स्टॉक से जुड़ी साप्ताहिक जानकारी देना भी जरूरी कर दिया गया है। इतना ही नहीं, गुजरात में टाटा पावर के मुंद्रा प्लांट को भी 2026 के आखिर तक पूरी क्षमता से चलाने का आदेश दिया गया है। ये सारे कदम इसलिए उठाए जा रहे हैं ताकि बिजली की बढ़ती हुई मांग को पूरा किया जा सके।