अब दिल रुकने के बाद भी अंगदान संभव, भारत का नया DCD नियम बचाएगा हजारों जिंदगियां
भारत में अंगों की कमी को दूर करने के लिए नए दिशानिर्देश बनाए जा रहे हैं। इसकी अगुवाई नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (NOTTO) कर रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य उन 70,000 से भी ज्यादा मरीजों को राहत दिलाना है, जो सिर्फ किडनी का इंतजार कर रहे हैं और इसके लिए उन्होंने अपना पंजीकरण करवाया हुआ है। दरअसल, यह इसलिए बेहद अहम है क्योंकि हर साल मृत दाताओं से सिर्फ करीब 2,000 किडनी ही मिल पाती हैं।
भारत DCD को लागू कर रहा है और नियमों को साफ कर रहा है
इन नए दिशानिर्देशों में 'डोनेशन आफ्टर सर्कुलेटरी डेथ' (DCD) का नियम सबसे बड़ा बदलाव है। इसका मतलब है कि अब उन लोगों के अंग भी दान किए जा सकेंगे जिनका दिल धड़कना बंद हो गया है। पहले सिर्फ ब्रेन-स्टेम डेथ वाले मरीजों के अंग ही दान में लिए जाते थे। उम्मीद है, इस बदलाव से अंग दाताओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। नए नियमों से यह भी साफ हो जाएगा कि अस्पताल ब्रेन-स्टेम डेथ के मामले में और अंगों की अदला-बदली को कैसे संभालेंगे। इन सबके साथ ही, विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि अंगदान से जुड़े कानून बेहतर हों, अंगों को निकालने के तरीके तेज हों और उनका वितरण भी सही तरीके से हो।