सरकार ने जानवरों पर होने वाले प्रयोगों के लिए तैयार किया नियमों का मसौदा, मांगी जाएगी लोगों की राय
भारत ने अभी-अभी जानवरों पर होने वाले प्रयोगों के लिए नए नियमों का एक मसौदा जारी किया है। इन नियमों का मकसद दवा रिसर्च के लिए मिलने वाली मंजूरियों को तेज और आसान बनाना है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पंजीकृत संस्थागत पशु आचार समितियां (IAEC) को अब ज्यादा तरह के प्रयोगों को मंजूरी देने की इजाजत मिलेगी। इससे पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के लिए समिति (CCSCA) से मंजूरी लेने की जरूरत कम हो जाएगी। इसके साथ ही एक नई व्यवस्था भी बनाई गई है जो प्रयोगों में जानवरों को होने वाले दर्द के स्तर के हिसाब से उन्हें बांटेगी। ये स्तर हैं: हल्का दर्द, मध्यम दर्द, गंभीर दर्द, या जहां जानवर को ठीक नहीं किया जा सकता।
सरकार का मसौदा '3R' पर देता है जोर
इन मसौदा नियमों में जानवरों पर होने वाले टेस्ट के '3R' सिद्धांत पर खास जोर दिया गया है। इनमें रिप्लेसमेंट (जब संभव हो तो जानवरों की जगह दूसरे तरीके अपनाना), रिडक्शन (कम जानवरों का इस्तेमाल करना) और रिफाइनमेंट (परीक्षणों को ज्यादा दयालु या कम दर्दनाक बनाना) शामिल है। IAEC समितियां कम और मध्यम दर्द वाले अध्ययनों को खुद ही मंजूरी दे सकती हैं, जबकि सिर्फ सबसे गंभीर मामलों में ही अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ेगी। इस प्रस्ताव में प्रयोगशाला के बेहतर ऑडिट और रिपोर्टिंग पर भी जोर दिया गया है। अगर आपके पास इन बदलावों को लेकर कोई राय है, तो सरकार ने अगले 30 दिनों के भीतर लोगों से राय मांगी है। इसके आधार पर भारत में रिसर्च और जानवरों के कल्याण के भविष्य की दिशा तय हो सकती है।