संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर CJI सूर्यकांत ने कहा- अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए
क्या है खबर?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि जब भारत के संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन होता है तो संवैधानिक अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने यह बात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह में कही। CJI सूर्यकांत ने कहा कि NHRC ने अवसर को जल विषय पर सम्मेलन के साथ मनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने मानवाधिकार आयोगों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका पर भी चर्चा की।
बयान
CJI ने क्या कहा?
CJI ने कहा, "केवल नल लगा होना पानी की उपलब्धता के बराबर नहीं है...सरकार को उन प्रणालियों का निर्माण और रखरखाव करना चाहिए जिनके माध्यम से पानी लोगों तक पहुंचता है। संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में न्यायालयों को हस्तक्षेप करना चाहिए। मानवाधिकार आयोगों को शिकायतों की जांच करनी चाहिए, व्यवस्थागत विफलताओं की पहचान करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन चिंताओं को अनदेखा किया जा सकता है, उन्हें संस्थागत ध्यान मिले।"
अधिकार
अधिकारों पर क्या बोले CJI?
CJI ने कहा कि जहां संवैधानिक न्यायालय संविधान के अनुच्छेद-32 और 226 के तहत उपचारों को लागू करने के लिए मजबूत रिट क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हैं, वहीं मानवाधिकार आयोगों के पास महत्वपूर्ण तथ्य-खोज तंत्र मौजूद है।
उन्होंने कहा, "लोग अक्सर कहते हैं कि आयोग केवल सिफारिश कर सकता है, आदेश नहीं दे सकता। लेकिन मैं एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना चाहूंगा...इसका उद्देश्य अन्याय की लहरों को शांत करना नहीं, बल्कि अंधकार में भटके लोगों के लिए मार्गदर्शक-प्रकाश बनना है।"