दक्षिण चीन सागर में भारत की 'ब्रह्मोस घेराबंदी', चीन की दादागिरी पर लगेगी लगाम
भारत दक्षिण चीन सागर के आसपास के देशों, जैसे कि वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस के साथ मिलकर काम कर रहा है। भारत इन देशों को ब्रह्मोस मिसाइलें हासिल करने में मदद कर रहा है।
इस बढ़ती साझेदारी को 'ब्रह्मोस बेल्ट' कहा जा रहा है। इस साझेदारी का मुख्य मकसद इन देशों को चीन के बढ़ते आक्रामक रवैये के खिलाफ मजबूत खड़ा होने में मदद करना है, लेकिन बिना किसी सीधी लड़ाई की नौबत आए।
फिलीपींस ने 37.5 करोड़ डॉलर के ब्रह्मोस सौदे से शुरुआत की
फिलीपींस ने 2022 में 37.5 करोड़ डॉलर के ब्रह्मोस मिसाइल सौदे के साथ इस पहल की नींव रखी। अब वियतनाम और इंडोनेशिया भी इस समझौते में शामिल हो गए हैं।
थाईलैंड के भी अगला देश होने की संभावना है। ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत उसकी तेज रफ्तार और सटीकता है। यह मिसाइल 290 किलोमीटर की दूरी तक मार कर बड़े समुद्री ठिकानों को निशाना बना सकती है।
चीन की समुद्री गतिविधियों पर लगाम लगाने में यह बेहद प्रभावी हो सकती है। इस तकनीक को इन देशों के साथ बांटकर, भारत सिर्फ अपना प्रभाव ही नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि दुनिया के सबसे तनावग्रस्त इलाकों में से एक में स्थिरता लाने में भी मदद कर रहा है।