भारत-कनाडा के बीच होगी द्विपक्षीय निवेश संधि, 2030 तक 4.65 लाख करोड़ के व्यापार का लक्ष्य
क्या है खबर?
भारत और कनाडा द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर जल्द से जल्द बातचीत शुरू करने पर सहमत हुए हैं। यह रणनीतिक कदम दोनों देशों के निवेश संबंधों को मजबूत करेगा और साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके कनाडाई समकक्ष फ्रांकोइस-फिलिप शैंपेन के बीच हुई वार्ता में BIT पर तेजी से बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी है।
वार्ता
द्विपक्षीय व्यापार का नया लक्ष्य क्या है?
इस वार्ता का मुख्य ध्यान दोनों देशों में आर्थिक सहयोग और निवेश को बढ़ाना है। दोनों पक्षों ने 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने के संकल्प को दोहराया है।
यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा मार्च 2026 में दिल्ली में हुई बैठक के दौरान द्विपक्षीय आर्थिक और वित्तीय संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता के बाद हुई है।
CEPA
2026 के अंत तक CEPA पर बातचीत भी होगी पूरी
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने 2026 के अंत तक 'कनाडा-भारत व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता' (CEPA) वार्ता को पूरा करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।
संयुक्त बयान में कहा गया है, "भारत ने जल्द से जल्द द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत शुरू करने की अपनी तत्परता व्यक्त की है।"
बता दें कि वित्त मंत्री सीतारमण 25 अगस्त से 2 सितंबर तक कनाडा और अमेरिका के दौरे पर हैं।
चर्चा
दोनों वित्त मंत्रियों में और क्या हुई चर्चा?
बयान के मुताबिक, दोनों मंत्रियों ने वैश्विक व्यापक आर्थिक घटनाक्रमों और घरेलू नीति प्राथमिकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
दोनों पक्षों ने भारत में कनाडाई पेंशन फंडों और अन्य संस्थागत निवेशकों की उपस्थिति का जिक्र किया और वित्तीय संस्थानों और निवेशकों के बीच ज्यादा सहयोग को प्रोत्साहित करने के उपायों पर चर्चा की।
दोनों पक्षों ने भुगतान आधुनिकीकरण, वित्तीय स्थिरता, फिनटेक नवाचार, पूंजी बाजार विकास और वित्तीय अपराध से निपटने के प्रयासों में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया।
UPI
UPI को लेकर भी बनी ये सहमति
दोनों वित्त मंत्रियों की वार्ता में कनाडा में भारतीय यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी बात बनी है।
दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और भविष्य की तकनीक के लिए सबसे जरूरी माने जाने वाले महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
मंत्रियों ने पारस्परिक हित के क्षेत्रों में ठोस सहयोग और परिणाम हासिल करने की दिशा में काम करने पर सहमति व्यक्त की।