यौन शिक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर का इंतजार, स्कूलों में बदलेगी बच्चों की दुनिया
केंद्र सरकार स्कूलों में यौन शिक्षा शुरू करने की तैयारी में है। हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी का इंतजार है। विशेषज्ञों की एक टीम ने यह योजना तैयार की है, जिसकी घोषणा 13 जुलाई को की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रिश्तों की बेहतर समझ देना है। इसके साथ ही यौन अपराधों से बच्चो का संरक्षण अधिनियम (POCSO) जैसे कानूनों से जुड़ी उलझनों को दूर करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप चलना भी इसका एक अहम मकसद है।
विशेषज्ञ पैनल ने उम्र के हिसाब से कक्षाओं का प्रस्ताव दिया
अगर इस योजना को हरी झंडी मिलती है, तो प्राथमिक स्कूल से ही छात्रों को हफ्ते में 2 बार उम्र के हिसाब से यौन शिक्षा दी जाएगी। इसे प्रशिक्षित शिक्षक ही पढ़ाएंगे। विशेषज्ञ पैनल का यह भी मानना है कि माता-पिता के लिए भी वर्कशॉप आयोजित किए जाएं, ताकि बच्चों के विकास और सुरक्षा को लेकर सभी की सोच एक जैसी हो। इस पहल का मुख्य लक्ष्य युवाओं को सशक्त बनाना है, ताकि वे असुरक्षित परिस्थितियों को पहचान सकें, अपनी सीमाएं निर्धारित कर सकें और जरूरत पड़ने पर सहायता मांग सकें।