181 साल का इंतजार खत्म! त्रिनिदाद में भारतीय अब जान पाएंगे अपनी जड़ों का पूरा सच
भारत और त्रिनिदाद-टोबैगो ने एक समझौता किया है। यह समझौता त्रिनिदाद में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को उनके पूर्वजों के इतिहास से जोड़ने में सहायक होगा। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नेल्सन आइलैंड पर इसकी घोषणा की। उन्होंने इस मौके पर 1845 में त्रिनिदाद-टोबैगो पहुंचे पहले भारतीय श्रमिकों को याद किया, जो आज से करीब 181 साल पहले की बात है। यह कदम गिरमिटिया समुदाय की उस कहानी को जीवित रखने और संरक्षित करने के एक बड़े अभियान का हिस्सा है, जिनके पूर्वज भारत से गिरमिटिया मजदूरों के तौर पर यहां आए थे।
गिरमिटिया अध्ययन केंद्र, नेल्सन आइलैंड सुधार
जयशंकर ने एक नए गिरमिटिया अध्ययन केंद्र की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य गिरमिटिया समुदाय के इतिहास और उनकी यात्रा पर गहरा शोध करना होगा।
इसके साथ ही, नेल्सन आइलैंड पर मौजूद विरासत स्थलों को बेहतर बनाने पर भी बात हुई। इन सुधारों के लिए भारत की ओर से फंड उपलब्ध कराया जाएगा। इन स्थलों पर स्मारक, डिजिटल आर्काइव और एक ऑडियो-विजुअल हब बनाए जाएंगे।