भारत की ऊर्जा क्रांति: 13 लाख करोड़ रुपये का तेल आयात कम करेगा कचरा और गोबर
भारत आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए अब बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) की ओर देख रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश की कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90 फीसदी आयात से पूरा हुआ था, जिस पर 13 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए थे। खास बात यह है कि बायोगैस को देश के भीतर ही फसल के कचरे, गोबर और ऐसी ही दूसरी चीजों से बनाया जा सकता है। इससे हमें विदेशी तकनीक या आपूर्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
भारत की सालाना 62 मिलियन मीट्रिक टन CBG क्षमता
हर साल देश में 500 मिलियन मीट्रिक टन से भी ज्यादा फसल का अवशेष निकलता है और लाखों परिवार पशुपालन करते हैं। इन संसाधनों के चलते भारत में सालाना 62 मिलियन मीट्रिक टन तक CBG बनाने की भरपूर क्षमता है।
एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वॉटर काउंसिल (CEEW) के अनुसार, सिर्फ 3 मवेशी ही किसी परिवार को साल भर में 7 LPG सिलेंडर के बराबर बायोगैस दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत इस बड़े संसाधन का सही इस्तेमाल करे, तो इससे ऊर्जा सुरक्षा तो बढ़ेगी ही, कचरा प्रबंधन भी आसान होगा और ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।