उत्तराखंड गुरुद्वारे में निहंग सिखों का विरोध प्रदर्शन थमा, जानिए क्या है पूरा मामला
उत्तराखंड के नागरसू गुरुद्वारे में उस वक्त तनाव का माहौल बन गया, जब 6 निहंग सिख छत पर चढ़ गए और प्रदर्शन करने लगे। वे कर्णप्रयाग में हुई एक झड़प के बाद गिरफ्तार किए गए अपने चार साथियों को रिहा करने की मांग कर रहे थे। अधिकारियों से बातचीत के बाद 2 निहंग सिख शांतिपूर्वक नीचे उतर आए। प्रशासन ने भरोसा दिया है कि हेमकुंड साहिब की यात्रा और गुरुद्वारे की सभी गतिविधियां पहले की तरह चलती रहेंगी।
निहंग सिखों का इतिहास और युद्धक परंपराएं
निहंग सिखों को अकाल निहंग भी कहा जाता है। ये अपने निडर स्वभाव और खास नीली वेशभूषा के लिए जाने जाते हैं। गुरु हरगोबिंद के समय में ये एक योद्धा समूह के रूप में उभरे थे और 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने इन्हें औपचारिक रूप से मान्यता दी। तलवारें रखने वाले और ऊंची पगड़ी (दूमल) पहनने वाले इन सिखों ने 18वीं शताब्दी में एक अहम भूमिका निभाई थी, जब सिख सेनाओं पर लगातार हमले और अत्याचार हो रहे थे। आज भी वे सिख धार्मिक आयोजनों में अपनी युद्धक परंपराओं को जिंदा रखते हैं और समुदाय में उन्हें इज्जत की नजर से देखा जाता है।